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जीपों की बढ़ती संख्या से केमू की बसों पर बुरा असर

Sat, 14 May 2016 11:57 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर
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केमू बस अड्डा बागेश्वर - फोटो : अमर उजाला
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बागेश्वर। जिले में जिस रफ्तार से सड़कों का जाल बिछ रहा है उस रफ्तार से कहीं अधिक जीपों की संख्या भी बढ़ती जा रही हैं। इसका सीधा असर एशिया की सबसे पुरानी कंपनी कुमाऊं मोटर्स यूनियन (केमू) पर पड़ा है। उसकी नई रूटों पर बसें चलने के बजाए जिन रूटों पर बसों का वर्षों से संचालन चल रहा था। उन पर बसों का चलना ही बंद हो गया है। जिस कारण जिला मुख्यालय से तहसीलों के लिए शाम पांच के बाद कोई बस नहीं है। बसों का ठीक से खर्चा तक नहीं निकल पाने के कारण यहां तैनात केमू कर्मियों का वेतन भी नियमित रूप से नहीं निकल पा रहा है।
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अलग राज्य गठन के बाद यहां सड़कों के निर्माण में खासी तेजी आई। अब सुदूरवर्ती कई गांव यातायात से जुड़ चुके हैं। यातायात की बेहतर सुविधा होने के कारण अब दूरस्थ गांवों के लोग एक ही दिन में अपना सारा काम निपटाकर अपने घर पहुंच जाते हैं। लोगों को उम्मीद थी कि सड़कों की लंबाई बढ़ने के साथ ही यहां केमू की बसों की संख्या भी बढ़ जाएंगी लेकिन हुआ ठीक उल्टा। यहां बसों की संख्या बढ़ने के बजाए जीपों की संख्या बढ़ती जा रही है। यहां जीपों की संख्या एक हजार के करीब पहुंच चुकी है जबकि यहां केमू की सिर्फ 57 बसों का ही आना, जाना है।

जीपों की बढ़ती संख्या के कारण जिला मुुख्यालय से दिन में 12 बजे रीमा, सोंग, सुबह सात बजे शामा, अपराह्न तीन, चार बजे शामा, एक बजे गोदियाधार, चार बजे बोहाला के लिए चलने वाली केमू की बस लंबे समय से बंद है। जीपों की बढ़ती संख्या के कारण जिला मुख्यालय से कपकोट, दुग नाकुरी, काफलीगैर, गरुड़ के लिए शाम पांच बजे के बाद कोई बस नहीं मिल रही। देर शाम बस न होने के कारण लोगों को महंगी दामों में जीपों को बुक कराने को मजबूर होना पड़ता है। कई बार बसें यहां से अपने रूट के लिए चलती भी हैं लेकिन सवारी न होने के कारण कुछ दूर जाने के बाद रास्ते में ही रुक जाती हैं।
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इस स्थिति में बस में बैठी गिनीचुनी सवारियों को भारी फजीहत झेलनी पड़ती है। यहां केमू में कुल 13 कर्मचारी तैनात हैं। इन पर कंपनी का महीने में करीब 1.32 लाख रुपये वेतन में खर्च होता है। बसों की संख्या न बढ़ने और लोगों की बसों के प्रति रुचि कम होने के कारण कर्मचारियों को नियमित रूप से वेतन भी नहीं मिल पा रहा है। केमू के स्थानीय प्रबंधक धरणीधर जोशी ने कहा कि बस स्टेशन से जीपें अनधिकृत रूप से सवारी भरती हैं।

कई बार जीप चालक बस में बैठी सवारी को भी उतारकर अपने वाहन में बिठा लेते हैं। बसों में पहले से अधिक सुविधाएं हैं। बसों में जीपों से किराया काफी कम है जबकि पहले से अब कम समय में यात्रा भी पूरी हो जाती है। स्टेशन से सवारी न बैठाने की बात करने पर कई बार जीप चालक लड़ने को भी आ जाते हैं। उन्होंने कहा कि यदि पुलिस प्रशासन सहयोग करे तो केमू के दिन फिर से सुधर सकते हैं।
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