बागेश्वर। जिले की स्वास्थ्य सेवाएं एक बार फिर वेंटिलेटर पर नजर आ रही हैं। पहाड़ों पर पथरीले रास्तों और विषम भूगोल के बीच हड्डी संबंधी रोगों और दुर्घटनाओं का ग्राफ ऊंचा रहता है, लेकिन पूरे जिले में हड्डी के उपचार की बेहतर व्यवस्था नहीं है। जिले में हड्डी रोग विशेषज्ञ के स्वीकृत पांच पदों के सापेक्ष स्थिति शून्य के करीब पहुंच गई है, जिससे मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ के दो पद सृजित हैं, लेकिन लंबे समय से यहां केवल एक ही चिकित्सक तैनात है। अब उनके भी अवकाश पर चले जाने से पूरे जिले की हड्डी उपचार की व्यवस्था चरमरा गई है। अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को बिना इलाज के बैरंग लौटना पड़ रहा है या फिर मजबूरन निजी अस्पतालों और बाहरी जिलों का रुख करना पड़ रहा है। जिले के तीनों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की स्थिति और भी खराब है। कांडा, बैजनाथ और कपकोट जैसे महत्वपूर्ण केंद्रों में हड्डी रोग विशेषज्ञ का एक-एक पद स्वीकृत है लेकिन स्वास्थ्य विभाग के दावों के बावजूद इन तीनों ही केंद्रों में आज तक एक भी विशेषज्ञ की तैनाती नहीं हो सकी है। दूरदराज के गांवों से आने वाले मरीजों के लिए अब जिला मुख्यालय ही एकमात्र सहारा था, जो अब विशेषज्ञ के छुट्टी पर होने से वह भी छिन गया है। हड्डी टूटने या गंभीर मोच आने पर गरीब मरीजों के लिए अब सरकारी अस्पताल में कोई विकल्प नहीं बचा है। जिला अस्पताल में डॉक्टर न होने के कारण लोगों को हल्द्वानी और अल्मोड़ा के चक्कर काटने पड़ रहे हैं।