बागेश्वर। मदर्स डे यानी मां के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का दिन, लेकिन तहसील के पौंसारी गांव के 14 वर्षीय पवन जोशी के लिए यह दिन स्मृतियों के उस गहरे जख्म की तरह है, जिसे काल के क्रूर पंजे ने 28 अगस्त की काली रात को उकेरा था। उस रात आई भीषण आपदा ने पवन की दुनिया ही उजाड़ दी थी। भूस्खलन और मलबे की भेंट चढ़कर पवन की मां बसंती देवी (43), पिता रमेश चंद्र और 10 वर्षीय छोटा भाई गिरीश काल के गाल में समा गए थे।
पवन उस रात मौत के मुंह से तो बच निकला लेकिन जब सुबह आंख खुली तो उसके पास अपना कहने को कुछ नहीं बचा था। बड़ा भाई गणेश दिल्ली में था लेकिन 14 साल की नाजुक उम्र में पवन को सबसे अधिक अपनी मां की जरूरत थी। ऐसे में कुदरत ने उसकी बड़ी बहन गुंजा मिश्रा को यशोदा बनाकर भेजा। अपनी मां को खोने वाली गुंजा ने अपने आंसू पोंछे और छोटे भाई पवन के लिए खुद मां बनने का संकल्प लिया। गुंजा अपने भाई पवन को हल्द्वानी स्थित अपनी ससुराल ले गई। आज पवन अपनी दीदी के ममतामयी संरक्षण में रहकर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहा है। गुंजा केवल उसकी बहन नहीं बल्कि उसकी गुरु, मार्गदर्शक और मां की कमी को पूरा करने वाली शक्ति बन चुकी है। पवन कहता है कि यद्यपि मां अब उसके पास नहीं है, पर दीदी के त्याग और ममता ने उसे कभी अनाथ होने का अहसास नहीं होने दिया।