बागेश्वर/गरुड़। चंद्र ग्रहण को देखते हुए जिले के प्रमुख मंदिरों के कपाट पूरे दिन बंद रहे। सूतक काल से पहले मंदिरों में पूजा अर्चना की गई। रात को ग्रहण समाप्त होने के बाद ही मंदिरों में शाम की आरती हुई।
होली की पूर्णिमा के दिन पड़ने वाले चंद्रग्रहण को देखते हुए नगर के बागनाथ मंदिर, काल भैरव मंदिर समेत अन्य देवी-देवताओं के मंदिरों के पट बंद कर दिए गए थे। बागनाथ मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष नंदन सिंह रावल ने बताया कि सुबह 6:45 बजे से पूर्व मंदिर में आरती, पूजा संपन्न कर दी गई थी। ग्रहण का सूतक काल शुरू होने से पहले मंदिर के सेवक खीमानंद और पुजारियों ने मंदिर के कपाट बंद कर दिए। पूरे दिन मंदिर के कपाट बंद रहे।
शाम को 6:45 बजे के करीब ग्रहण समाप्त होने के बाद मंदिर के कपाट खोले गए। मंदिर में पूरी सफाई के बाद भगवान शिव को पवित्र जल से स्नान कराया गया। इसके बाद शाम की आरती संपन्न की गई। गरुड़ के बैजनाथ धाम और कोट भ्रामरी मंदिर समेत जिले के अन्य स्थानों के प्रमुख देवालयों के कपाट भी ग्रहण के चलते बंद रहे। आचार्य डॉ. रमेश चंद्र कांडपाल ने बताया कि ग्रहण के दिन सूतक काल से पहले स्नान और पूजा-पाठ की जाती है। ग्रहण स्पर्श होने के बाद जप, पूजा, अर्चना की जाती है। ग्रहण के बाद स्नान कर जनेऊ बदली जाती है। इसके बाद भगवान की पूजा-अर्चना कर चंद्रमा के निमित्त दान किया जाता है। ग्रहण काल में किए गए जप का महत्व काफी बढ़ जाता है।
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