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बजट नहीं मिलने से हेलीपैड पर मंडराया खतरा

Thu, 02 Jun 2016 10:48 PM IST
गणेश उपाध्याय, अमर उजाला बागेश्वर।
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हेलीपैड - फोटो : अमर उजाला
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शासन ने नगर पंचायत कपकोट के केदारेश्वर मैदान में 80 लाख रुपये की लागत से हेलीपैड का निर्माण तो कर दिया है। लेकिन, इसकी सुरक्षा के नाम पर अब तक कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। कुछ समय बाद बरसात का सीजन आने वाला है। लोगों का कहना है कि सुरक्षा के शीघ्र बंदोबस्त नहीं किए गए तो हेलीपैड के भविष्य पर खतरे के बादल मंडराने लगेंगे। 
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बता दें कि जिला बाढ़ और भूस्खलन की दृष्टि से संवेदनशील जबकि भूकंप की दृष्टि से जोन पांच में आता है। उसमें भी कपकोट तहसील तो हर दृष्टि से अतिसंवेदनशील श्रेणी में है। गत वर्ष शासन के तत्कालीन मुख्य सचिव राकेश शर्मा ने कपकोट ब्लॉक मुख्यालय में अधिकारियों की बैठक ली थी। इसमें उन्होंने कपकोट में  जिला आपदा प्रबंधन केंद्र की स्थापना का एलान किया था।

इसके तहत हेलीपैड का निर्माण और सरयू से हेलीपैड की सुरक्षा करने प्रस्ताव था। एडीबी आपदा खंड की ओर से केदारेश्वर मैदान में हेलीपैड का निर्माण तो हो गया है, लेकिन हेलीपैड के निर्माण के लिए सरयू किनारे सुरक्षा दीवार और पिंडारी सड़क से मैदान तक आने के लिए सीसी मार्ग बनाने का काम अभी तक शुरू नहीं हो सका है। कुछ समय बाद बरसात का सीजन शुरू हो जाएगा। सरयू नदी में पानी अधिक आने से लहरेें काफी ऊंची हो जाती हैं।
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पानी से मैदान की सुरक्षा के लिए चार साल पहले मनरेगा से सरयू के किनारे सुरक्षा दीवार का निर्माण किया गया था। सरयू में हर साल भीषण बाढ़ आती है। बाढ़ की चपेट में आने से सुरक्षा दीवार जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई है। उसका भी आज तक पुनर्निर्माण नहीं किया जा सका है। 

मालूम हो कि बाढ़, भूस्खलन और भूकंप की दृष्टि से कपकोट तहसील क्षेत्र अतिसंवेदनशील श्रेणी  में आता है। तहसील क्षेत्र के उच्च हिमालयी क्षेत्र के कई गांव अभी तक सड़क से नहीं जुड़ सके हैं। निर्माणाधीन सड़कों का निर्माण भी अभी तक पूरा नहीं हो सका है। सड़कें पहली बारिश में ही मलबा भरने, धंसाव और कटाव से बंद हो जाती हैं। गांवों में स्थापित गिने चुने अस्पतालों में डॉक्टरों का अकाल है। इसके अलावा वहां संचार सेवा भी चौपट है।

हेलीपैड बनाने का उद्देश्य यही था कि यदि कभी क्षेत्र में आपदा जैसी स्थिति आती है तो वहां से हताहतों को तुरंत हेलीकाप्टर के जरिये पास के बेहतर अस्पतालों या सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। लाखों रुपये की लागत से हेलीपैड का निर्माण तो हो गया लेकिन उसकी सुरक्षा के आज तक कोई इंतजाम नहीं किए गए हैं। 

सरयू से हेलीपैड की सुरक्षा के लिए प्रोटक्शन वॉल और पिंडारी सड़क से हेलीपैड तक आने के लिए करीब 165 मीटर लंबे सीसी मार्ग के लिए शासन को गत फरवरी में 70 लाख रुपये का इस्टीमेट भेजा था। तब से बजट मंजूर नहीं हो सका है। समय से बजट नहीं मिलने के कारण प्रस्तावित काम शुरू नहीं हो सके हैं। अब बरसात का सीजन सिर पर है। इस बीच बजट मिल भी गया तो उसका समय पर उपयोग होना किसी भी हालत में संभव नहीं है।
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- मनोज जोशी, प्रोजेक्ट मैनेजर वुडहिल कंपनी। 
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