अवैज्ञानिक और बेतरतीब खड़िया खनन से खदान क्षेत्रों में बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। जेसीबी मशीनों के जरिए उपजाऊ खेत और हरी-भरी पहाड़ियां खोखली की जा रही हैं। खान पट्टाधारकों ने तमाम नियम-कानून ताक पर रखे दिए हैं। चोरी छिपे लीज से बाहर खदान किया जा रहा है।
बेतरतीब खनन न सिर्फ पर्यावरण के लिए खतरनाक है, बल्कि बरसात में बाढ़ और भूस्खलन का सबब भी बनता है। जिले के पुंगरघाटी, नाकुरी पट्टी, कांडा समेत विभिन्न हिस्सोें में खड़िया के 64 खनन पट्टाधारक एमएल और चार के पास प्रोस्पेटिंग लाइसेंस (पीएल) हैं। मानक के अनुसार खदान वैज्ञानिक विधि से होना है।
खदान के बाद गड्ढों का भरान कर वर्षा और शरद ऋतु में वहां पौधरोपण करना जरूरी है। पौधों की सुरक्षा के लिए ट्री गार्ड लगाए जाने हैं। पहले से अब अधिकतर खानों में जेसीबी मशीनों से खदान हो रहा है। इन मशीनों के प्रयोग से जहां दूर तक धरती हिल रही है वहीं गहराई तक खदान होने के कारण आसपास की सुरक्षा पर भी खतरा मंडराने लगा है।
बेतरतीब खदान से कुछ स्थानों पर तालाब भी बन गए हैं। खदान के दौरान पांव फिसलकर गिरने से अब तक कई श्रमिकों की मृत्यु हो चुकी है। खान मालिक प्रभावित परिवारों को मामूली सा मुआवजा देकर मामलों को रफा-दफा कर देते हैं। कुछ पट्टाधारक चोरी छिपे स्वीकृत लीज स्थल से बाहर खनन करते हैं।
ऐसे मालिकों की ऊंची पकड़ होने के कारण प्रशासन उनके खिलाफ एकदम हाथ डालने में हिचकिचाता है। हालांकि अब तक अवैध खनन करने वालोें को दबोचकर उनसे अर्थदंड भी वसूला गया है। अनियंत्रित और अवैज्ञानिक खनन से कई स्थानों पर खतरे के बादल मंडरा है।