जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम ने एक बीमा कंपनी के लिए शिकायतकर्ता को 3.15 लाख रुपये का भुगतान करने के आदेश पारित किए हैं। दीपा देवी पत्नी कवींद्र सिंह ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम में शिकायती पत्र देकर कहा था कि उनके पति के पास वाहन नंबर यूके 02 टीए 0374 विक्टा सूमो थी।
पांच मई 2011 को यह वाहन भराड़ी सोंग सड़क में बांसे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई। दुर्घटना के समय वाहन श्री राम जनरल इंश्योरेंस कंपनी की शाखा से बीमित था। दुर्घटना में वाहनस्वामी उसके पति खुद वाहन चला रहे थे। उनकी दुर्घटनास्थल पर ही मृत्यु हो गई जबकि वाहन पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो गया था।
दुर्घटना की सूचना बीमा कंपनी को दी गई जिस पर विपक्षी बीमा कंपनी के सर्वेयर मौके पर आकर वाहन को स्वयं ले गया था। वाहन पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हो जाने के कारण उसका दावा 2.85 लाख रुपये आंका गया। कबाड़ 65 हजार रुपये का निर्धारित हुआ।
इसके बावजूद विपक्षी बीमा कंपनी ने उसे सिर्फ 65 हजार रुपये दिए, लेकिन बीमा की राशि 2.85 लाख रुपये नहीं दिए। इसके लिए वह कई बार बीमा कंपनी बंशीकुंज तिकोनिया हल्द्वानी के शाखा प्रबंधक अमित पंत से मिलती रही, कंपनी को भी कई पत्र लिखे। इसके बावजूद उसका भुगतान नहीं किया गया।
उसके पति ने ग्रामीण बैंक से लोन लेकर वाहन खरीदा था। जिस पर बैंक में 14 प्रतिशत वार्षिक की दर से ब्याज चुकाना पड़ा। इन्हीं तथ्यों के आधार पर शिकायतकर्ता ने शिकायत की। फोरम ने दोनों पक्षकारों को सुना। बयान, साक्ष्यों के आधार पर फोरम ने बीमा कंपनी को दोषी माना।
फोरम के जिलाध्यक्ष के जिलाध्यक्ष और जिला जज डा. ज्ञानेंद्र कुमार शर्मा और फोरम की सदस्य मीना फर्त्याल ने आदेश पारित किया कि कंपनी शिकायतकर्ता दीपा देवी को 2.85 लाख रुपये वाहन की बीमा की राशि, एक जनवरी 2012 से अंतिम भुगतान तक इस राशि पर नौ प्रतिशत वार्षिक दर से ब्याज, 20 हजार रुपये मानसिक कष्ट, क्लेश के लिए क्षतिपूर्ति, 10 हजार रुपये वाद व्यय इस निर्णय के एक माह के भीतर दें।
ऐसा न करने पर शिकायतकर्ता को यह अधिकार होगा कि वह इस फोरम के माध्यम से इस निर्णय को निष्पादित कराकर उक्त धनराशि वसूल कर ले।