गोमती नदी पर 1962 में बना मोटर पुल बड़े वाहनों के चलने में झूला पुल की तरह हिल रहा है। पुल के फर्श में डाली गई लोहे की प्लेटों के ऊपर किया गया हॉटमिक्स हटाने के बाद पुल पर कंपन और अधिक बढ़ गया है। इसके बावजूद एनएच की ओर से कोई कदम नहीं उठाया जा रहा है।
गोमती और सरयू नदी पर 56 वर्ष पूर्व बने मोटर पुलों के फर्श जगह-जगह पर टूट जाने के कारण नेशनल हाइवे ने दो साल पहले इन पुलों का सुधारीकरण किया था। दोनों पुलों के कंक्रीट के फर्श को तोड़कर उसके स्थान पर लोहे की प्लेटें डाली गईं।
इसके बाद इसके ऊपर हॉटमिक्स कर दिया गया। लोहे की प्लेटों में किया गया हॉटमिक्स कुछ ही महीनों में उखड़ गया था। डामर के चटखने के कारण राहगीरों के लिए खतरा पैदा हो गया था। इसके बाद विभाग ने दोनों पुलों के फर्श में किया गया डामर साफ कर दिया।
इस डामर के हटते ही गोमती नदी के पुल में वाहनों के संचालन में जोरदार कंपन हो रहा है। क्लास बी लोडिंग के लिए निर्मित इस पुल की क्षमता 10 टन की है। इस पुल के ऊपर से प्रतिदिन सैकड़ों की संख्या में छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं।
इनमें सबसे अधिक संख्या भार से लदे ट्रकों की रहती है। भारी वाहनों के चलते समय यह मोटर पुल किसी झूला पुल की तरह हिलने लग जाता है। पुल की ऐसी हालत होने के बावजूद विभाग की ओर से उसके सुधारिकरण के लिए कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
लोहे के फर्श पर हॉटमिक्स और कंक्रीट नहीं टिकता है। इसको देखते हुए अब गोमती और सरयू पुलों के फर्श पर मैस्टिक एस्पार्ट करने की योजना है। स्वीकृति के लिए फाइल शासन को भेजी गई है। स्वीकृति मिलते ही मैस्टिक एस्पार्ट कर दिया जाएगा। - हितेश कांडपाल, एई एनएच।