सुंदरढुंगा ग्लेशियर जाने वाला रास्ता ट्रैकरों के लिए जान का दुश्मन बना हुआ है। थोड़ी सी चूक में जीवन और मौत का फासला बस पल भर का ही रहता है, लेकिन फिर भी साहसिक यात्रा पर जाने वाले लोग इस जोखिम को चुनौती देने में चूकते नहीं हैं। बहरहाल शासन और प्रशासन को ट्रैकरों की सुविधा का ध्यान रखना ही चाहिए।
अहमदाबाद निवासी मोहिल पांडे और गुड़गांव निवासी नमन चिलवाल ने सुंदरढुंगा ग्लेशियर की यात्रा से लौटने के बाद बताया कि इस गलेशियर को जोड़ने वाला रास्ता अभी तक ठीक नहीं हुआ है। लगभग छह किलोमीटर रास्ता गायब है। ढ़ुंगियाढौन से कटहलिया तक रास्ता बेहद खतरनाक है।
यहां सुंदरढुंगा नदी के किनारे से होकर जाने में भारी कठिनाई हो रही है। वहां नदी किनारे चट्टानों का पकड़कर जाना पड़ रहा है। थोड़ी सी चूक जान पर भारी पड़ सकती है। वापसी में भी जातोली गांव तक आने के में भारी कठिनाई हुई। सुंदरढ़ुंगा से लौटे योगेश परिहार और गिरीश परिहार ने बताया कि इस रास्ते पर आठ स्थानों में जोखिम है।
सुदरढुंगा नदी ने अपना रास्ता बदल दिया है। जातोली के ग्रामीणों ने बताया कि कठहलिया तक चौदह किमी रास्ते को बनाने के लिए काम शुरू हुआ था जो अभी तक तीन किमी ही बन सका है। अब बारिश के कारण काम रोक दिया गया है।