बागेश्वर। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार से आने वाले बच्चों की गंभीर बीमारी या ऑपरेशन में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम वरदान साबित हो रहा है। योजना के तहत स्वास्थ्य विभाग ने जन्म से बहरेपन की शिकार दो साल की बच्ची का सफल ऑपरेशन करवाया है। अब तक 13 बच्चों और किशोरों का योजना के तहत निशुल्क इलाज या सर्जरी की जा चुकी है।
गरुड़ के दुर्गम गांव डुमलोट के भूपाल थापा और सुविधा थापा की दो साल की बच्ची हिमांशी जन्मजात बहरेपन से ग्रसित थी। बच्ची की सर्जरी में सात लाख रुपये का खर्चा होना था। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत अनुबंधित अस्पताल स्व. एसएन मेहरोत्रा मेमोरियल ईएनटी फाउंडेशन कानपुर में बच्ची का निशुल्क इलाज हुआ। अब बच्ची पूरी तरह से ठीक है और उसे सुनाई भी देने लगा है।
शून्य से 18 साल तक मिलता है योजना का लाभ
बागेश्वर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम योजना की शुरूआत 14 नवंबर 2014 को हुई थी। योजना के तहत 0 से 18 साल तक के बच्चों को जन्मजात विकृति, कमियां, विकासात्मक देरी और विकलांगता, बचपन के रोग के इलाज की निशुल्क सुविधा दी जाती है। योजना के तहत नवजात बच्चे की जांच प्रसव केंद्र पर, छह सप्ताह तक के बच्चों की जांच आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर करते हैं।
कोट
जिले के तीनों ब्लाॅकों में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम तैनात हैं। टीम के डॉक्टर, फार्मासिस्ट और अन्य स्टाफ आंगनबाड़ी केंद्र और विद्यालय में बच्चों की जांच कर छोटी बीमारियों का मौके पर इलाज करते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के इलाज में योजना काफी लाभदायक सिद्ध हो रही है। - डॉ. देवेश चौहान, एसीएमओ, बागेश्वर।