बागेश्वर। रोजगारपरक शिक्षा के दावों के बीच कई संस्थान बुनियादी सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं। जिले के कठपुड़ियाछीना में बने आईटीआई का भी हाल ऐसा ही है। आईटीआई में इलेक्ट्रीशियन ट्रेड की पढ़ाई होती है, लेकिन भवन में बिजली का प्रबंधन ही नहीं है। इतना ही नहीं अनुदेशक का पद रिक्त होने के कारण महीने में केवल दो सप्ताह ही छात्रों की पढ़ाई हो पाती है।
कठपुड़ियाछीना में वर्ष 2011 में राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) का शुभारंभ हुआ था। वर्ष 2017 तक संस्थान में तीन ट्रेड की पढ़ाई हुई लेकिन वर्ष 2018 में संस्थान बंद हो गया। क्षेत्रवासियों की लगातार मांग के बाद वर्ष 2022 में फिर से आईटीआई का संचालन शुरू हुआ मगर इस बार एक ट्रेड कम कर दी गई। वर्तमान में आईटीआई में दो ट्रेड सिलाई-कताई और इलेक्ट्रीशियन संचालित हो रहे हैं। सिलाई-कताई ट्रेड में चार जबकि इलेक्ट्रीशियन ट्रेड में 14 छात्र हैं। आईटीआई के पास अपना भवन नहीं होने से इसका संचालन विकास भवन के नाम से बनी बिल्डिंग में किया जा रहा है। इस भवन में बिजली का कनेक्शन ही नहीं है। बिजली नहीं होने से इलेक्ट्रीशियन विषय पढ़ने वाले प्रशिक्षुओं को प्रयोगात्मक कार्य करने में दिक्कत हो रही है। संस्थान में सिलाई-कताई के लिए संविदा के तहत एक महिला अनुदेशक हैं, लेकिन इलेक्ट्रीशियन के अनुदेशक का पद रिक्त हैं। कांडा आईटीआई से एक-एक सप्ताह के लिए महीने में अनुदेशक पढ़ाने आते हैं। संवाद
युवाओं के भविष्य की हो रही अनदेखी
बागेश्वर। कठपुड़ियाछीना संघर्ष समिति के अध्यक्ष नरेंद्र सिंह रावत कहते हैं कि प्रशिक्षण संस्थान में सुविधाओं का अभाव होने से युवाओं को दिक्कत हो रही है। बिजली का प्रबंध नहीं होने से युवाओं की शिक्षा पर असर पड़ रहा है। शासन-प्रशासन को आईटीआई में बिजली लगवाने, विषय बढ़ाने और अनुदेशक के रिक्त पदों को भरने का प्रयास करना चाहिए। संवाद
कोट
पूर्व में आईटीआई बंद होने के बाद बिजली का कनेक्शन कट गया था। बिजली विभाग को बकाया बिल की जानकारी भेजने को पत्र लिखा है। जवाब मिलते ही बिल का भुगतान कर कनेक्शन लगाया जाएगा। इलेक्ट्रीशियन के अनुदेशक की व्यवस्था कांडा आईटीआई से की गई है। जो 15-15 दिन दोनों संस्थानों में प्रशिक्षण दे रहे हैं।
- उदय राज सिंह, प्रभारी प्राचार्य, आईटीआई कठपुड़ियाछीना