जमीन में बैठकर परीक्षा देते राइंका देवतोली बच्चे।
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पीएस डसीला स्मारक राइंका देवतोली के हालात पहाड़ी क्षेत्रों के अन्य सरकारी स्कूल की तरह ही दयनीय है। 213 छात्रसंख्या वाले इस स्कूल में बच्चे जमीन पर बैठकर परीक्षा देने को मजबूर है। इसके साथ ही स्कूल में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। स्कूल में लिपिक सहित शिक्षकों के कई पद खाली है। ऐसे में बच्चों का बेहतर भविष्य बनने की बात पर सवाल खड़े होते हैं।
अमर उजाला ने मंगलवार को बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिले की सीमा पर स्थित राइंका देवतोली की लाइव रिपोर्ट करी। आजकल बच्चों की अर्धवार्षिक परीक्षा चल रही है तो प्रभारी प्रधानाचार्य गणेश गोस्वामी विद्यालय खुलने से 20 मिनट पहले ही स्कूल पहुंच गए। सुबह 9:04 पर चतुर्थ श्रेणी कर्मी ने पहली घंटी बजाई। 9:06 बजे एक छात्रा स्कूल पहुंची।
इसके बाद 9:10 बजे अन्य छात्रों का आना शुरू हुआ। 9:16 बजे प्रार्थना की घंटी बजी। एक छात्र प्रार्थना के आठ मिनट बाद पहुुंचा तो प्रधानाचार्य ने उसे आगे से समय पर आने को कहा। 9:28 पर बच्चों की अर्द्धवार्षिक परीक्षाएं शुरू हुई। फर्नीचर नहीं होने के कारण बच्चे जमीन पर बैठकर ही परीक्षा दे रहे थे। आधुनिक युग में बच्चों को कंप्यूटर भी नसीब नहीं हैं। पानी की लाइन भी अस्तव्यस्त है। हालांकि शौचालयों की स्थिति संतोषजनक मिली।
प्रभारी प्रधानाचार्य ने बताया कि विद्यालय में पूर्णकालिक प्रधानाचार्य, प्रधान और सहायक लिपिक, चौकीदार, स्वच्छक प्रवक्ता में रसायन, भौतिक, जीव विज्ञान, गणित, इतिहास, हिंदी एलटी में व्यायाम, कला, विज्ञान के शिक्षक नहीं हैं। प्रधानाचार्य गोस्वामी ने बताया कि विद्यालय की समस्याओं से उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया है।