बागेश्वर। नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में अनियंत्रित आग पर काबू पाने और बचाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले अग्निशमन विभाग में मुखिया के साथ ही 70 फीसदी फायरमैनों के पद खाली हैं।
जिला मुख्यालय के साथ ही कपकोट और गरुड़ में फायर स्टेशन हैं। जिला अग्निशमन अधिकारी का पद कई वर्षों से खाली है। अग्निशमन द्वितीय अधिकारी के तीन में से दो पद खाली हैं। जिले में स्वीकृत फायरमैनों के 26 में से 18 पद खाली हैं। स्टाफ, वाहनों और उपकरणों की कमी से अग्निकांड के समय परेशानी होती है। बागेश्वर में दो वाटर टैंकर, एक मिनी वाटर टैंकर, एक पंप और एक बाइक है। एक पंप की कमी है। फायर टैंकरों की अधिकतम क्षमता 2400 लीटर है, जिससे रेस्क्यू के समय पानी की कमी हो जाती है। मुख्यालय से पांच हजार लीटर क्षमता वाले टैंकरों की मांग की गई है। गरुड़ फायर स्टेशन में एक वाटर टैंकर, एक पंप उपलब्ध है। एक मिनी वाटर टैंकर, एक बाइक, वुडकटर की कमी है। कपकोट फायर स्टेशन में एक वाटर टैंकर, एक पंप है। फायर स्टेशन में एक मिनी वाटर टैंकर, एक पंप की कमी है।
रेस्क्यू के लिए रोप लांचर और ब्रीदिंग ऑपरेटर मिले
बागेश्वर। अग्निशमन विभाग को रेस्क्यू के लिए रोप लांचर (नदी, पहाड़ पार करने में सहायक उपकरण) मिल गया है। दो ब्रीदिंग ऑपरेटर मिले हैं। ब्रीदिंग ऑपरेटर से धुएं के दौरान आग पर काबू पाने में मदद मिलती है। प्रभारी अग्निशमन अधिकारी महेश चंद्र ने बताया कि कोरोना के कारण रोप लांचर का प्रशिक्षण नहीं हो पाया है। प्रशिक्षण के बाद रोप लांचर का प्रयोग शुरू होगा। जंपिंग पैड, नेट, रेस्क्यू वाहन, वुड कटर, अग्निरोधक एजवेस्टर शूट की मांग की गई है।