बागेश्वर। टेंडर होने के तीन साल बाद भी पुल न बनने से आक्रोशित सोराग के लोगों ने जिला मुख्यालय में कार्यदायी संस्था वॉप्कोस के खिलाफ जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया। इलाके के लोगों ने बगैर काम हुए करोड़ों रुपये आहरित करने आरोप लगाया है। मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग के लिए कलक्ट्रेट परिसर में बेमियादी अनशन शुरू कर दिया है।सोराग की ग्राम प्रधान सीता देवी के नेतृत्व में सोमवार को जिला मुख्यालय पहुंचे लोगों ने कलक्ट्रेट तक जुलूस निकाला। कार्यदायी संस्था पर घपलेबाजी का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। इलाके के लोग कलक्ट्रेट परिसर में क्रमिक अनशन पर बैठ गए।
डीएम के माध्यम से सीएम को भेजे ज्ञापन में ग्रामीणों ने कहा कि वर्ष 2000 में उंगिया से सोराग के लिए 11 किमी सड़क मंजूर हुई है। वर्ष 2023 में सड़क का काम पूरा किया गया। सड़क पर डामरीकरण भी हो गया है लेकिन पिंडर नदी पर चार करोड़ 57 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत पुल का निर्माण नहीं किया गया। पुल न बनने से लोगों को सड़क का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों ने कहा है कि पुल के लिए वर्ष 2021 में टेंडर लगा दिए गए थे। पुल की सामग्री क्रय करने के लिए ठेकेदार को करीब ढाई करोड़ रुपये का भुगतान भी कर दिया। कार्यदायी संस्था ने फरवरी 2024 तक पुल का निर्माण कार्य पूरा करने का लिखित आश्वासन दिया लेकिन आज तक पुल की सामग्री तक स्थल पर नहीं पहुंची है। कहा है कि कई बार मामला प्रशासनिक अधिकारियों के सामने उठा दिया गया है लेकिन कोई कार्यवाही नहीं की गई। कहा है कि प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच होने तक आंदोलन जारी रहेगा। वहां पर पार्वती देवी, हंसा देवी, पुष्पा देवी, रमौती देवी, राधा देवी, तारा देवी, लोकपाल सिंह, दिनेश सोरागी, दरवान सिंह, उमराव सिंह, चरण सिंह बघरी, दीवान सिंह दानू, बलवंत सिंह दानू, माधो सिंह आदि थे।
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सड़क निर्माण में भी धांधली
बागेश्वर। सोराग के ग्रामीणों ने सीएम को दिए ज्ञापन में उंगिया-सोराग सड़क के निर्माण में भी धांधली का आरोप लगाया है। कहा है कि सड़क की मानक के अनुसार चौड़ाई नहींं है। सड़क पर कलमठ और कॉजवे नहीं बनाए गए हैं। सुरक्षा दीवारों की ऊंचाई काफी कम है। डामर की गुणवत्ता भी खराब है। ग्रामीणों ने सड़क निर्माण की भी जांच कराने की मांग की है। संवाद