बागेश्वर। राज्य बनने के 20 साल बाद भी उत्तरायणी मेले को राज्य मेला घोषित होने का इंतजार है। इसे राज्य मेले का दर्जा देने की घोषणा प्रदेश के छह मुख्यमंत्री कर चुके हैं। सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत की घोषणा के बाद शासन ने मेले को ए श्रेणी में तो सूचीबद्ध कर दिया है, लेकिन राज्य मेले का दर्जा नहीं मिल सका है।
सरयू-गोमती संगम पर हर साल मकर संक्रांति से उत्तरायणी मेला लगता है। यह ऋषि मार्कंडेय की तपोस्थली रही है। यहां भगवान शिव व्याघ्र रूप में मौजूद हैं। चंद राजाओं ने एक हजार साल पहले इस स्थान पर माघ मेले का आयोजन शुरू किया था। संगम पर 14 जनवरी 1921 को भारत माता के सपूतों ने कुली बेगार जैसे अंग्रेजी हुकूमत के काले कानूनों के रजिस्टरों को सरयू में बहा दिया था। इस निर्णय से कूर्मांचल में आजादी की ज्वाला तेज हो गई थी। मेले का ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, व्यावसायिक रूप से महत्व होने के बावजूद राज्य बनने के 20 साल भी राज्य मेले का दर्जा मिलने की कोई उम्मीद नहीं है।
राज्य के छह मुख्यमंत्री मेले को राज्य मेले का दर्जा देने की घोषणा कर चुके हैं। साल 2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री एनडी तिवारी ने इसे राज्य मेले का दर्जा दिलाने की घोषणा की थी। इसके बाद भुवन चंद्र खंडूरी, डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, विजय बहुगुणा, हरीश रावत समेत वर्तमान सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत ने मेले को राज्य मेले का दर्जा देने की घोषणा कर चुके हैं। साल 2019 में शासन ने सीएम की घोषणा को अमलीजामा पहनाते हुए इसे ए श्रेणी में तो सूचीबद्ध किया, लेकिन राज्य मेले का दर्जा नहीं मिल पाया है।
कब किसने की उत्तरायणी मेले को राज्य मेले का दर्जा देने की घोषणा
-2004 में तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी
-2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी
-2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक
-2013 में तत्कालीन मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा विजय
-2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत
-2018 में मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत
पालिका अपने संसाधनों से करती है मेले का संचालन
बागेश्वर। राज्य मेला घोषित होने के बाद मेले का खर्चा राज्य सरकार उठाएगी। इससे मेले के संचालन में पालिका को परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ेगा। पिछले साल मेले का करीब 55 लाख का खर्च आया था। इसमें आमदनी केवल 39 लाख हुई थी। नगर पालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल ने बताया कि पालिका अपने संसाधनों से मेले का संचालन करती है, जिसमें मेले के ए श्रेणी में सूचीबद्ध होने के कारण प्रशासन की ओर से सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए तीन लाख से अधिक की सहायता राशि दी जाती है।
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उत्तरायणी मेले के लिए पालिका ने 300 दुकानों का किया आवंटन
बागेश्वर। उत्तरायणी मेला शुरू होने में अब महज चार दिन बचे हैं। इसलिए पालिका प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मेले के दौरान होने वाले कार्यक्रम समेत पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज का मुख्य अतिथि बनना भी तय हो चुका है। शुक्रवार तक पालिका 300 दुकानें आवंटित कर चुकी है। दुकानों का आवंटन मेला शुरू होने तक किया जाएगा।
शुक्रवार को नगर पालिका अध्यक्ष सुरेश खेतवाल ने नुमाइशखेत मैदान, सरयू बगड़, भोटियापड़ाव क्षेत्र और सरयू पुल के अलावा बागनाथ परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने तैयारियों को लेकर जानकारी ली। नगर में रंगाई-पुताई का काम पूरा हो चुका है। सजावट के लिए चमकीली पन्नी के झालर लगाए गए हैं। सरयू पुल, झूला पुल, चौक बाजार, दुग बाजार, खड़ी बाजार, गोमती पुल, बागनाथ मंदिर और नुमाइशखेत में झालर लगाने का काम पूरा हो चुका है। मेले के लिए दुकान आवंटन किया जा रहा है। सरयू बगड़ पर पालिका ने समतलीकरण कराया था, लेकिन सरयू का जलस्तर बढ़ने से जलभराव हो गया था। इससे पालिका के सामने आवंटित व्यापारियों को विस्थापित करने की समस्या हो रही थी लेकिन, शुक्रवार को मौसम में बदलाव और धूप आने के बाद सरयू का जलस्तर कम हो गया है। जिससे पालिका को राहत मिली है।
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मेले के 34 व्यापारियों का सत्यापन किया
बागेश्वर। उत्तरायणी मेले में बाहरी जिलों से व्यापारियों/लोगों की आवाजाही शुरू हो गई है। सबकी सुरक्षा एवं कानून व्यवस्था के मद्देनजर पुलिस सत्यापन अभियान के तहत कोतवाली पुलिस नगर क्षेत्र में स्थित होटल/ढाबों की चेकिंग की गई। कोतवाल डीआर वर्मा ने बताया कि उत्तरायणी मेले में दूसरे जिलों से आए 34 व्यक्तियों (व्यापारियों) का पुलिस सत्यापन किया गया है। जीएसटी पंजीकरण की भांति पुलिस के सत्यापन को भी जरूरी किया गया है। ब्यूरो
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नुमाइशखेत मैदान में लगेगा विभागीय स्टाल
बागेश्वर। जिला निर्वाचन कार्यालय की ओर से उत्तरायणी मेले के लिए नुमाईशखेत मैदान में स्टाल लगाया जाएगा। इसमें स्वीप टीम को तैनात किया जाएगा। मेले की शुरुआत से पहले 13 जनवरी को स्टाल का निरीक्षण किया जाएगा। विभागीय स्टाल में लोगों के बीच प्रचार के लिए स्वीप से संबंधित पोस्टर/बैनर की छपाई के बारे में आकलन किया जाएगा। एडीएम राहुल गोयल ने नोडल अधिकारी स्वीप/परयोजना निदेशक डीआरडीए, मुख्य शिक्षा अधिकारी समन्वयक स्वीप और डायट/सहायक नोडल अधिकारी स्वीप के प्रवक्ता कैलाश प्रकाश चंदोला से नुमाईशखेत मैदान में विभागीय स्टाल में कार्मिकों की तैनाती करने को कहा गया है। ब्यूरो