महाशिवरात्रि पर्व से जिले में बैठकी होली गायन ने जोर पकड़ लिया है। कमस्यार घाटी के लोगों ने टोकेश्वर, गोपेश्वर महादेव के मंदिर में व काकड़ा की महिलाओं ने गांव के अखाड़े में देर रात तक होली के गीतों का गायन किया। होल्यारों ने शिव गंग चली जग तारन को... समेत कई होली के गीत गाकर समां बांधा।
रावतसेरा महादेव के मंदिर में होलयारों ने बैठकी होली की शुरुआत शिव गंग चली जग तारन को...गाकर की। उन्होंने पूजो गणपति देवा...,रंग दिनी राजकुमार खेलत होली..., होली खेलत नंद लाल..., सबको मुबारक होरी फाल्गुन ऋतु...समेत कई होली के गीतों का गायन किया। हारमोनियम पर त्रिलोक रावत, ढोलक पर दीपक रौतेला, चिमटे पर सुरेश रावत ने संगत दी। वहां गिरधारी सिंह रावत, सूबेदार बहादुर सिंह डसीला, प्रवीण रौतेला, लाल सिंह रावत, मोहन जोशी और योगेश रावत आदि थे।
धपोलासेरा के गोपेश्वर महादेव मंदिर में होल्यारों ने शिवजी के मन में बसें काशी..., उत्तर कैलाश से आए फकीरा...,रंगीली बहार बसंत बहार आई..., जय भोले भंडारी कैलाश वासी...समेत कई अन्य होली के गीतों का गायन कर समां बांधा। हारमोनियम पर मोहन सिंह, ढोलक पर रमेश दास, ने संगत दी। इस मौके पर भवान सिंह धपोला, रमेश धपेेला, राजेंद्र सिंह, किशोरी पंत, तारा पंत, मोहन चंद्र चंदोला, विरेंद्र धपोला और भावेश धपोला आदि थे।
इधर खोली ग्राम पंचायत के काकड़ा गांव की महिलाओं ने होली के अखाड़े में एकत्रित होकर होली के कई गीतों का गायन कर सभी को झूमने के लिए मजबूर कर दिया। महिलाओं ने होली के गीतों की शुरूआत गणेश जी की आराधना से की। उन्होंने खेले पशुपतिनाथ ..., नगर नैपाला में...,शिव के मन माही समेत कई अन्य मन मोहक होली के गीतों का गायन किया। इस मौके पर कलावती, हंसी, नीमा, रीता और तारा कांडपाल आदि शामिल थी।