बागेश्वर जिले में पानी के डिस्चार्ज में कमी के कारण 35 बस्तियां गंभीर जल संकट से जूझ रही हैं। पानी के डिस्चार्ज में 25 से 50 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है। जिले में जल स्रोत सूखने से 20 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई हैं।
जिले में 847 आबाद गांव और दो नगरीय क्षेत्र हैं। नगर और गांवों में जलापूर्ति के लिए 178 पेयजल योजनाओं का निर्माण किया गया है। इनमें से 176 योजनाओं से ग्रामीण जबकि दो योजनाओं से नगरीय क्षेत्र में आपूर्ति होती है। जल संस्थान द्वारा हाल में किए गए सर्वे में जनपद की 35 बस्तियों में जल संकट मिला।
इसका कारण पानी के डिस्चार्ज में कमी आना है। जल संस्थान के अधिकारियों के अनुसार चिन्हित बस्तियों के लिए बनी योजनाओं के आधे स्रोतों से डिस्चार्ज में 25 प्रतिशत जबकि आधी योजनाओं में 50 प्रतिशत तक की कमी आई है। स्रोतों में पानी की कमी के कारण लोगों को जरूरत का पानी नहीं मिल पाता है। यही हाल नगरीय क्षेत्रों का भी है।
नगरीय क्षेत्रों में आबादी के हिसाब से नई पेयजल योजनाओं का निर्माण नहीं करने से जिला मुख्यालय में अधिकांश आबादी को वर्ष भर जल संकट की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। बागेश्वर शहर के मंडलसेरा और कठायतबाड़ा क्षेत्रों में हाल ही में जिले के दौरे पर आए प्रदेश के पेयजल मंत्री प्रकाश पंत ने पंपिंग योजनाओं के निर्माण का आश्वासन दिया है। इससे जल संकट से जूझ रही नगरीय क्षेत्र की जनता को राहत मिलने की उम्मीद है।
जनपद की कुल जनसंख्या- 2.62 लाख
आबाद ग्रामों की संख्या- 847
पेयजल योजनाएं - 178
ग्रामीण- 176
नगरीय - 2
हैंडपंप- 524
जिले में 35 ऐसी बस्तियां चिन्हित की गई हैं जिनमें पानी का डिस्चार्ज कम होने से जल संकट पैदा हुआ है। स्रोतों में पानी कम होने से इन बस्तियों के लिए बनी योजनाओं के पानी में 25 से 50 प्रतिशत तक की कमी आई है। जल संकट से ग्रस्त बस्तियों के लिए नई पेयजल योजनाएं बनाने का प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा जाएगा। नीरज तिवारी, सहायक अभियंता, जल संस्थान।