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Bageshwar News: पूर्व जिला युवा कल्याण अधिकारी और वरिष्ठ सहायक को सात-सात साल का सश्रम कारावास

Thu, 23 Mar 2023 11:41 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
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बागेश्वर। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट गुंजन सिंह की अदालत ने पूर्व जिला युवा कल्याण अधिकारी और वरिष्ठ सहायक को सात-सात साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। दोषियों को अर्थदंड से भी दंडित किया गया है। मामले के दो अन्य आरोपियों को परीविक्षा पर छोड़ दिया गया।
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अभियोजन पक्ष से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2012-13 में बागेश्वर जिले में जिला युवा कल्याण अधिकारी के पद पर तैनात जीवन लाल और वरिष्ठ सहायक चित्रा पांडेय पर विभाग में नौ पीआरडी जवानों को फर्जी तरीके से 2,45,980 रुपये के भुगतान करने का आरोप था। उक्त पीआरडी जवान विभाग में नियोजित ही नहीं थे। फर्जी भुगतान के मामले की जांच के लिए 28 अप्रैल 2017 को जिलाधिकारी ने जांच समिति का गठन किया। समिति में डीडीओ कैलाश नाथ तिवारी, मुख्य कृषि अधिकारी वीके मौर्य और सहायक सांख्यिकी अधिकारी कमनाथ मेहरा शामिल थे। समिति ने मामले की जांच कर पांच अगस्त 2017 को डीएम को जांच रिपोर्ट सौंपी।
युवा कल्याण प्रांतीय रक्षक दल के निदेशक के आदेशानुसार 18 सितंबर 2018 को प्रभारी युवा कल्याण अधिकारी अर्जुन सिंह रावत ने बागेश्वर कोतवाली में केस दर्ज कराया। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ धारा 409, 420 और 120 बी के तहत केस दर्ज किया और विवेचना के बाद न्यायालय में आरोप पत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष की ओर से सहायक अभियोजन अधिकारी दाऊद सिद्दकी, नामिका अधिवक्ता मोहन राम और पवन कुमार लोहनी ने मामले की पैरवी करते हुए सात गवाह पेश कराए। न्यायालय ने मामले के विचारण के बाद दोनों आरोपियों पर दोष सिद्ध किया।
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न्यायालय ने अभियुक्त जीवन लाल आर्या को धारा 409 के तहत सात साल का सश्रम कारावास और 50 हजार अर्थदंड, धारा 420 और धारा 120 बी के तहत सात-सात साल के सश्रम कारावास और 30-30 हजार के अर्थदंड की सजा सुनाई। मामले की दूसरी अभियुक्त चित्रा पांडेय को धारा 409 के तहत सात साल के सश्रम कारावास और 20 हजार के अर्थदंड, धारा 420 और 120 बी के तहत पांच-पांच साल के सश्रम कारावास और 20-20 हजार के अर्थदंड की सजा से दंडित किया। दोनों आरोपियों को अर्थदंड जमा नहीं करने पर छह-छह माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भोगना होगा।
ऐसे खुला मामला
बागेश्वर। तत्कालीन युवा कल्याण अधिकारी और वरिष्ठ सहायक ने जिन नौ पीआरडी जवानों को फर्जी तरीके से भुगतान किया था उनमें अनुज कुमार और अरुण पंत के खाते में ऑनलाइन भुगतान होने से मामला खुला। इन दोनों पीआरडी जवानों को भी मामले में आरोपी बनाया गया और उनके खिलाफ धारा 120 बी के तहत केस दर्ज किया गया। विभाग से अनुज के बैंक ऑफ बड़ौदा वाले खाते में 13,180 और अरुण के खाते में 51,750 रुपये स्थानांतरित किए गए थे। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को ट्रांजेक्शन के आधार पर दोष सिद्ध करते हुए उन्हें परीविक्षा में छोड़ने का आदेश भी सुनाया।
सेवानिवृत हो गए जीवन लाल, देहरादून में तैनात हैं चित्रा
बागेश्वर। फर्जी भुगतान के आरोपी पूर्व जिला युवा कल्याण अधिकारी वर्ष 2015 में विभाग से सेवानिवृत हो गए थे, जबकि आरोपी वरिष्ठ सहायक चित्रा पांडेय वर्तमान में देहरादून में तैनात है। संवाद
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