बागेश्वर। कोरोना काल में गांव लौटे प्रवासी स्वरोजगार में रुचि दिखाने लगे हैं। 106 प्रवासियों ने पेट्रोल पंप, पोल्ट्री हाउस, फर्नीचर उद्योग, वुडन एंड स्टील फर्नीचर, मिनी फ्लोर मिल, होटल बनाने के लिए लोन का आवेदन पत्र उद्योग विभाग में दिया है। हालांकि यह संख्या घर लौटे प्रवासियों की संख्या से काफी कम है लेकिन स्वरोजगार में रुचि दिखाना पलायनग्रस्त जिले के लिए सुकून देने वाली बात है।
लॉकडाउन अवधि में 32146 प्रवासी घर लौटे हैं। सरकार और प्रशासन इन प्रवासियों को घर में रोकने की कवायद कर रहा है। इनमें से जिले के 106 प्रवासियों ने स्वरोजगार के लिए आवेदन किया है। जिला उद्योग केंद्र को मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में 53, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में 45 और सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम (एमएसएमई) में आठ आवेदन आए हैं। जिला उद्योग केंद्र के मुताबिक मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में 53 लोगों ने 1.41 करोड़ रुपये, प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में 45 लोगों ने 2.23 करोड़ रुपये और एमएसएमई में आठ लोगों ने 4.41 करोड़ रुपये के लोन के लिए आवेदन किया है। विभाग ने सत्यापन के बाद सभी आवेदन पोर्टल पर अपलोड कर दिए हैं। लोन स्वीकृत करने के लिए बैंकों को भेज दिए हैं। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना में लोन की अधिकतम सीमा सेवा क्षेत्र में 10 लाख रुपये और विनिर्माण क्षेत्र में 25 लाख है। इसमें 25 प्रतिशत सब्सिडी मिलेगी। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम में लोन की अधिकतम सीमा सेवा क्षेत्र में 10 लाख रुपये, विनिर्माण क्षेत्र में 25 लाख रुपये है। जिसमें शहरी क्षेत्र के लिए सब्सिडी 25 प्रतिशत, ग्रामीण क्षेत्र में सब्सिडी 35 प्रतिशत मिलेगी, जबकि एमएसएमई में लोन की कोई अधिकतम सीमा नहीं है, जबकि वित्तीय प्रोत्साहन, छूट के तहत अचल पूंजी निवेश प्रोत्साहन सहायता अधिकतम 40 लाख रुपये तक या अधिकतम 40 प्रतिशत मिलेगी। ब्याज उपादान सहायता अधिकतम आठ लाख रुपये या दस प्रतिशत की छूट मिलेगी।
सत्यापन के बाद के आवेदन पत्र जमा करने की प्रक्रिया चल रही है। कोरोना काल में लोगों का फार्मिंग सेक्टर, मुर्गीपालन, दुग्ध व्यवसाय, मत्स्य पालन, मशरूम की खेती और खच्चर पालन की ओर अधिक रुझान है।
- वीसी चौधरी, महाप्रबंधक, जिला उद्योग केंद्र, बागेश्वर।