बागेश्वर। कुमाऊं केसरी पंडित बद्रीदत्त पांडे राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में मंगलवार को मुरारीलाल माहेश्वरी राष्ट्रीय वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन हुआ। इसमें बागेश्वर के सौरभ जोशी प्रथम, कंचन मिश्रा दूसरे, मनीषा भट्ट तीसरे स्थान पर रहीं। अनीता नेगी और उर्मिला बिष्ट को सांत्वना पुरस्कार मिला। मुख्य अतिथि रहे प्राचार्य डॉ. मनोज उप्रेती ने विजेताओं को नकद पुरस्कार और प्रमाणपत्र प्रदान किए। उन्होंने कहा कि ऐसे सकारात्मक आयोजन से युवाओं की प्रतिभा का विकास होता है।
रसायन विभाग परिसर में आयोजित प्रतियोगिता का विषय था - ‘सोशल मीडिया पर प्रतिबंध देशहित में जरूरी है’। इसके लिए जिले के सभी पांच महाविद्यालयों से पक्ष-विपक्ष में दो-दो प्रतिभागी चुनकर भेजे गए थे लेकिन सोमवार रात से मंगलवार दोपहर तक हुई मूसलाधार बारिश के कारण राजकीय महाविद्यालय कांडा के प्रतिभागी नहीं पहुंच सके। इस कारण दुग नाकुरी महाविद्यालय बनलेख और मेजबान बागेश्वर कॉलेज से एक-एक अतिरिक्त प्रतिभागी को बोलने का मौका मिला।
अधिकतर वक्ताओं ने बेहतर प्रस्तुति दी जबकि जिला स्तर के आयोजन में पहली बार मंच पर बोलने पहुंचे कुछ प्रतिभागियों में हिचक रही। वक्ताओं का कहना था कि सोशल मीडिया पर प्रतिबंध नहीं नियंत्रण रहना चाहिए। अति कहीं भी स्वीकार्य नहीं है। उनका कहना था कि पवन पहाड़ी समेत कई प्रतिभाओं को वह सोशल मीडिया से ही जानते हैं। हालांकि उन्होंने अफवाहों से बचने पर भी जोर दिया। यश फाउंडेशन के अध्यक्ष भुवन फर्स्वाण, शिक्षक प्रशांत पांडे, डॉ. एसएस धपोला निर्णायक रहे।
प्रथम स्थान पर रहे सौरभ को पांच हजार, कंचन को तीन हजार और मनीषा को दो हजार का नकद पुरस्कार दिया गया। वहीं अनीता और उर्मिला को सांत्वना पुरस्कार के रूप में एक हजार रुपये दिए। विजेता प्रतिभागी को इस माह हल्द्वानी में प्रस्तावित मंडल स्तरीय प्रतियोगिता में भी शामिल होने का मौका मिलेगा।
जीतने से ज्यादा जरूरी है सहभागिता
बागेश्वर महाविद्यालय की प्रियंका मेर, निशा राणा, गरुड़ के जगदीश चंद्र जोशी, हिमानी बोरा, दुग नाकुरी की रेनू, गीता, दीपा, सुभद्रा चौहान, कपकोट की लता ने भी अपना पक्ष रखा। निर्णायकों ने उनसे कहा कि आप भले ही पुरस्कार न जीते हों लेकिन किसी भी प्रतियोगिता में जीतने से पहले जरूरी है सहभागिता। वह काम आपने किया। फल, नतीजे की चिंता मत करना।
इन्होंने बढ़ाया प्रतिभागियों का उत्साह
वार्ड मेंबर धीरेंद्र परिहार, छात्रसंघ अध्यक्ष शशांक वर्धन, पूर्व अध्यक्ष हरीश मेहरा, डॉ. पंकज कुमार दूबे, डॉ. निशा चौहान, डॉ. किरन, डॉ. चंद्रकांता आर्या, डॉ. शालिनी पाठक, ज्योति दीक्षित, दीप्ति कार्की, वीरेंद्र सिंह आदि ने प्रतिभागियों का उत्साह बढ़ाया।
सोशल मीडिया से ही देशव्यापी बन सका पुस्तक, शिक्षक आंदोलन
व्यक्तित्व विकास में सोशल मीडिया मददगार है। इससे अवसर प्राप्ति होती है। कला के प्रचार, प्रसार में भी सोशल मीडिया की अहम भूमिका है। पवन पहाड़ी, हिमा दास, पिथौरागढ़ का पुस्तक, शिक्षक आंदोलन भी सोशल मीडिया से ही देशव्यापी बन सका। यह समाज के हर वर्ग को जोड़ने, नियंत्रित करने वाली ताकत है। युवाओं को रोजगार, दौलत, शोहरत भी इसी से मिल रही है। - सौरभ जोशी, कुमाऊं केसरी पंडित बद्रीदत्त पांडे राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बागेश्वर
सोशल मीडिया पर प्रतिबंध नहीं अंकुश लगना चाहिए
सोशल मीडिया पर प्रतिबंध नहीं अंकुश लगना चाहिए। यह हमारी दिनचर्या का अभिन्न अंग बन गया है। इस पर कई भ्रामक सूचनाएं भी आती हैं लेकिन उन पर विश्वास नहीं करना चाहिए। सोशल होना बेहतर है लेकिन इनका आदी नहीं होना चाहिए क्योंकि किताबों से अधिक निर्भरता सोशल मीडिया पर होना चिंताजनक है। इसमें महिलाओं के प्रति हो रहा दुष्प्रचार भी बंद होना चाहिए। धर्म, संस्कृति की मर्यादा बनाए रखना हम सबकी जिम्मेदारी है। - कंचन मिश्रा, स्व. चंद्र सिंह शाही राजकीय महाविद्यालय कपकोट, बागेश्वर
सोशल मीडिया से पढ़ाई के प्रति क्रेज कम हो गया
सोशल मीडिया ने आंतरिक शक्ति का विनाश किया है। इससे पढ़ाई के प्रति क्रेज कम हो गया है। अखबार, पत्रिकाओं की बिक्री घटने लगी है। लोगों की तर्कशक्ति घटने लगी है। हमें संस्कारों पर भी ध्यान देना चाहिए। इसमें आने वाली अच्छी, बेहतर सूचनाओं का ही प्रचार, प्रसार करना चाहिए। अकारण लाइक, शेयर और कमेंट्स नहीं करने चाहिए। इनकी संख्या कम, ज्यादा होने से भी कोई असर नहीं पड़ना चाहिए। -मनीषा भट्ट, कुमाऊं केसरी पंडित बद्रीदत्त पांडे राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, बागेश्वर