बागेश्वर के भागीरथी नाले में प्रदूषण ही नहीं अतिक्रमण भी किया गया है। अतिक्रमण में आम लोग ही नहीं स्वयं नगरपालिका भी शामिल है। नियमों को ताक पर रखकर नगरपालिका ने न केवल नाले के बीचोंबीच भवन बनाया बल्कि उसमें मीट मार्केट भी खोल दिया। मीट मार्केट और इससे कुछ मीटर आगे स्थित स्लाटर हाउस की गंदगी इसी भागीरथी नाले में प्रवाहित हो रही है।
बागेश्वर में बागनाथ मंदिर के समीप से होकर बहने वाली सरयू और गोमती नदियों के साथ ही विलुप्त सरस्वती की मान्यता होने से भागीरथी गधेरे का भी विशेष महत्व है। लेकिन आज यह नाला न केवल प्रदूषण की मार झेल रहा है बल्कि नाले में अतिक्रमण भी किया गया है। शहरी क्षेत्र में किसी भी निर्माण कार्य के लिए तमाम नियम कायदों का पाठ पढ़ाने वाली नगरपालिका ने ही सबसे बड़ा अतिक्रमण किया है। भागीरथी नाले के बीचोंबीच नियमों के विपरीत न केवल भवन का निर्माण किया गया बल्कि उसमें मीट बाजार खोल दिया गया।
इस मीट बाजार की गंदगी सीधे भागीरथी नदी में गिरती है। इतना ही नहीं स्लाटर हाउस भी मीट बाजार से कुछ ही दूरी पर है। इस स्लाटर हाउस की गंदगी भी भागीरथी को दूषित कर रही है। नगरपालिका ने ही नियम कायदों को ताक पर रखा तो लोग भी अपने घरों की गंदगी नाले में डालते रहे। नाले की गंदगी आगे जाकर सीधे सरयू में मिल जाती है। यह लोगों की आस्था के साथ बड़ा खिलवाड़ है। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि इस नाले को प्रदूषण और अतिक्रमण मुक्त करने के लिए आज तक कोई काम ही नहीं हुआ।