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वीपीकेएस संस्थान की तीन वैरायटी को लैंड मार्क का दर्जा

Mon, 20 Feb 2017 11:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो अल्मोड़ा
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पुरस्कार प्राप्त करते वीपीकेएस निदेशक डा. अरुणव पट्टनायक आदि।  - फोटो : अमर उजाला
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। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान को एक और उपलब्धि प्राप्त हुई है। देशभर में 1980 से पूर्व की सभी 51 प्रजातियों में वीपीकेएस के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार मक्के और गेहूं की वैरायटी को भी लैंड मार्क वैरायटी(युगांतकारी) का दर्जा मिला है। देश में हरित क्रांति के दौर में जब खाद्यान्न का संकट पैदा हुआ था, तब देश भर के वैज्ञानिकों ने 30 प्रजातियां विकसित की थीं उनमें अल्मोड़ा के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार मक्का और गेहूं की प्रजाति भी शामिल रही थी। इसमें मक्का की संकर किस्म वीएल-54 को देश की पहली संकर किस्म की प्रजाति होने का गौरव प्राप्त है।


 93 साल पुराने वीपीकेएस संस्थान ने विभिन्न फसलों की अब तक 140 वैरायटी निकाली हैं। इनमें गेहूं की वीएल-421 और मक्का की वीएल-54 और हिम-128 प्रजाति सबसे पुरानी प्रजाति है, जिन्हें लैंड मार्क वैरायटी का दर्जा मिला है। वीएल-421 गेहूं प्रजाति को 1978 में केंद्रीय प्रजाति विमोचन समिति द्वारा उत्तर पश्चिमी पर्वतीय क्षेत्रों के उत्पादन के लिए जारी किया था। यह प्रजाति उस समय की पीला रतुवा रोग की 14 जातियों के लिए प्रतिरोधी थी। यह प्रजाति 90 के दशक तक सर्वाधिक प्रचलित प्रजाति रही थी। मक्का की संकर किस्म वीएल-54 जिसे देश की पहली संकर किस्म की प्रजाति होने का गौरव प्राप्त है, 1962 में केंद्रीय प्रजाति विमोचन समिति द्वारा उत्तर पश्चिमी के पहाड़ी क्षेत्रों में उत्पादन के लिए जारी किया गया था।
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वहीं मक्का की दूसरी प्रजाति हिम-128 को 1979 में हिमाचल और यूपी के पर्वतीय क्षेत्रों के लिए जारी किया गया था। मक्का की दोनों प्रजातियों की उपज क्षमता 5.30 और 6.5 टन प्रति हेक्टेयर थी। यहां यह बताना जरूरी है कि लैंड मार्क वैरायटी में शामिल मक्का और गेहूं की प्रजाति को उस समय वीपीकेएस संस्थान के संस्थापक और प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो. बोसी सेन के नेतृत्व में संस्थान के पूर्व निदेशक डा. जेपी टंडन, स्व. एचसी जोशी, प्रभारी निदेशक रहे स्व. वीपी मनी और उनकी टीम ने विकसित किया था। बीते दिनों प्रतिष्ठित इंडियन सोसायटी आफ जेनेटिक्स एंड प्लांट ब्रिडिंग नई दिल्ली ने मक्का और गेहूं की इन प्रजातियों को लैंड मार्क वैरायटी का दर्जा देते हुए संस्थान के निदेशक डा. अरुणव पट्टनायक, पूर्व निदेशक डा. जेपी टंडन और उनकी टीम को पुरस्कृत किया था।
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कोट- 
संस्थान के लिए गौरव का क्षण है जब देश भर की 51 प्रजातियों में वीपीकेएस की तीन प्रजातियों को लैंड मार्क वैरायटी का दर्जा मिला है। इन प्रजातियों का विकास हरित क्रांति के दौर में देश में खाद्यान्न संकट के दौर में प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो. बोसी सेन के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने किया था। तब देशभर में 30 प्रजातियां विकसित हुई थीं और खाद्यान्न का अभाव दूर करने में सहायक सिद्ध हुई थी। 
डा. अरुणव पट्टनायक, निदेशक वीपीकेएस अल्मोड़ा। 

 
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