बागेश्वर। जिले में इन दिनों बिजली का संकट गहरा गया है। बीते अगस्त में आई आपदा के दौरान जिले में स्थापित पिटकुल केंद्र को भारी नुकसान पहुंचा था जिसे पांच महीने बीत जाने के बाद भी संचालित नहीं किया जा सका है। इसका खामियाजा अब जिले की जनता को रोस्टिंग के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
जिले का अपना केंद्र बंद होने के कारण अब बिजली को अल्मोड़ा और रानीखेत से लंबी दूरी तय कर यहां पहुंचना पड़ रहा है। लंबी दूरी की इन लाइनों में तकनीकी दिक्कतें और वोल्टेज ड्रॉप की समस्या आम है। सर्दी के मौसम में हीटिंग उपकरणों के प्रयोग से बिजली की मांग अपने चरम पर है जिससे बाहरी लाइनें भार झेलने में नाकाम साबित हो रही हैं। ग्रिड को ट्रिपिंग और बड़े फाल्ट से बचाने के लिए विभाग के पास अब कटौती के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। सुबह और शाम के समय घरों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बिजली की सबसे ज्यादा जरूरत होती है। उसी दौरान रोस्टिंग की जा रही है। इससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि यदि आपदा के तुरंत बाद मरम्मत कार्य युद्धस्तर पर किया जाता तो आज इस भीषण ठंड में अंधेरे का सामना नहीं करना पड़ता।
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बीते अगस्त में आपदा के कारण जिले में स्थापित पिटकुल केंद्र को भारी नुकसान पहुंचा था। जो अभी तक पूरी तरह संचालित नहीं हो सका है। वर्तमान में हम अल्मोड़ा और रानीखेत से सप्लाई ले रहे हैं लेकिन लंबी दूरी की लाइन होने और सर्दी के कारण बढ़े अत्यधिक भार की वजह से सिस्टम पर दबाव है। ग्रिड की सुरक्षा के लिए पीक आवर्स में रोस्टिंग की जा रही है। उपभोक्ताओं से इस संकट की घड़ी में सहयोग की अपील है। -मो. अफजाल, ईई यूपीसीएल, बागेश्वर