कपकोट (बागेश्वर)। देशभर में धराली आपदा राहत की बातें हो रही हैं। पूरे उत्तराखंड में ऐसे कई गांव हैं जिनकी पुकार को सिस्टम ने अनसुना कर दिया है। बागेश्वर जिले का सुदूरवर्ती हिमालयी गांव पोथिंग अपने हाल पर चुपचाप सिसक रहा है। यहां ढाई हजार लोगों का जीवन पिछले एक पखवाड़े से दुनिया से अलग-थलग पड़ा है।
पोथिंग गांव की सड़क पर भूस्खलन थम नहीं रहा है। गांव की दुकानों में रखा जरूरी सामान और सस्ते गल्ले की दुकान का राशन खत्म हो रहा है। सब्जी उत्पादकों, टैक्सी चालकों और गांव के व्यापारियों का नुकसान बढ़ता जा रहा है। बीमार पड़ने पर लोगों को अस्पताल लाना भी दूभर हो रहा है।
बीते 23 जुलाई को चीराबगड़-पोथिंग सड़क मलबा आने से बंद हो गई थी। 24 जुलाई को उसे खोला लेकिन 25 जुलाई को फिर से भूस्खलन होने के कारण वाहनों की आवाजाही थम गई। तब से सड़क खोलने के लिए जेसीबी लगी हैं लेकिन खराब होते मौसम में भूस्खलन थम नहीं रहा है। सड़क बंद होने से गांव के लोगों को तहसील मुख्यालय आने में दिक्कत हो रही है। गांव से स्कूल और कॉलेज के लिए कपकोट आने वाले छात्र-छात्राएं पहाड़ी चढ़कर पहुंच रहे हैं। भूस्खलन वाले क्षेत्र से लोग जोखिम उठाकर पैदल आवाजाही कर रहे हैं।
अंधेरे में जी रहे हैं मातोली के परिवार
पोथिंग गांव 11 तोक से मिलकर बना है। तहसील क्षेत्र की सबसे बड़ी ग्राम पंचायतों में शुमार पोथिंग में 2500 से अधिक की आबादी निवास करती है। पूरी ग्राम पंचायत को जोड़ने वाली यह एकमात्र सड़क है। गांव के मातोली तोक में बिजली भी नहीं है। इससे 250 की आबादी परेशानी का सामना कर रही है।
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सड़क बंद होने से दुकान का सामान लाना मुश्किल हो गया है। एक बार घोड़े से सामान मंगाया था जो काफी महंगा पड़ा। अब दुकान खाली हो रही है और आर्थिक संकट भी बढ़ रहा है। बाजार से सामान मंगवाने में लोगों को अतिरिक्त रुपया खर्च करना पड़ रहा है। महेश सिंह गढ़िया, व्यापारी
यातायात बाधित होने से गांव के लोगों का तहसील मुख्यालय आना बंद हो गया है। जरूरी काम के लिए लोगों को पैदल चलना पड़ रहा है। भूस्खलन वाली जगह से पैदल चलना भी जोखिम भरा हो रहा है। बीमार होने पर लोग अस्पताल आने की बजाय घर पर ही दवा मंगाने के लिए मजबूर हैं। 20-25 बच्चों की पढ़ाई पर भी असर पड़ रहा है। कमलेश गढ़िया, ग्रामीण
सड़क बंद होने से टैक्सियां खड़ी हो गई हैं। रोजाना वाहन चलाकर परिवार चलाने और किश्त निकालने लायक रकम जुटती थी। गाड़ी खड़ी होने से पूरा रूटीन गड़बड़ा गया है। आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। ललित गढ़िया, टैक्सी चालक
सरकारी सस्ता गल्ले का राशन खत्म हो गया है। सड़क खुलने तक राशन लाना भी संभव नहीं है। लोग गेहूं, चावल की मांग करने लगे हैं। जल्द सड़क खुले तभी परेशानी दूर होगी। देवकी नंदन जोशी, सस्ता गल्ला विक्रेता
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सड़क का बड़ा हिस्सा भूस्खलन की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हो गया है। एक जुलाई से जेसीबी की मदद से सड़क खोलने का प्रयास किया जा रहा है। बीच-बीच में बारिश होने और फिर से भूस्खलन होने से काम प्रभावित हो रहा है। आधे से अधिक मलबा हटाया जा चुका है। मौसम ने साथ दिया तो जल्द सड़क पर यातायात सुचारू करा दिया जाएगा। - अंबरीश रावत, ईई पीएमजीएसवाई कपकोट
सड़क बंद होने से गांव के लोगों को काफी परेशानी हो रही है। सब्जियां खेतों में बर्बाद हो रही हैं। गैस सिलिंडर, राशन, खाद्य सामग्री की दिक्कत होने लगी है। गांव में संचार, बिजली की परेशानी है। विभाग को जल्द सड़क खुलवानी चाहिए। सरस्वती देवी, नव निर्वाचित ग्राम प्रधान