जिले के अंतिम गांव ठांगा के तुषरेड़ा तोक की पनुली आमा अब तक 97 वसंत देख चुुुकी हैं। जीवन के अंतिम पड़ाव में पहुंच चुकी आमा ने अभी तक गांव के सड़क से जुड़ने की आस नहीं छोड़ी है।
लेकिन सरकारों का हाल देखिए गांव सड़क से अब जुड़ेेगा, तब जुड़ेगा के आश्वासनों में आजादी के भी 68 साल निकल चुके हैं, पर सड़क निर्माण के नाम पर आज तक एक फावड़ा तक नहीं चल सका है। सड़क नहीं बनने से जहां गांव के विकास पर प्रतिकूल असर पड़ा है। वहीं नई पीढ़ी का गांव छोड़कर जाने का सिलसिला जारी है।
सड़क नहीं बनने से बच्चे से लेकर बुजुर्ग सभी परेशान हैं। वह कहती हैं ‘इजा पुश्त बीत गेईं सड़क बड़ि नै नेता उनि भोट भोट कुनी।’ यानी लंबा समय बीत गया लेकिन गांव के लिए सड़क नहीं बन सकी है। नेता आते हैं और वोट-वोट करते हैं। सड़क होती तो विकास भी होता।
- पनुली आमा।
शासन प्रशासन की उपेक्षा के चलते स्कूलों में बच्चों की संख्या हर साल घटती जा रही है। राजकीय प्राइमरी स्कूल में तीन बच्चे जबकि राजकीय जूनियर हाईस्कूल में आठ बच्चे पढ़ रहे हैं। शिक्षक नहीं होने से कई लोग अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए दूसरे स्थानों को जा चुके हैं।
- रतन सिंह धानिक।
सड़क के बगैर गांव का विकास ठप है। सड़क नहीं होने का बहाना बनाकर अधिकारी गांवों के भ्रमण पर नहीं आते हैं। इस कारण उन्हें विकास योजनाओं की जानकारी नहीं मिल पाती है। गांव की पगडंडियां भी किसी खतरे से कम नहीं हैं। सड़क होती तो गांव का उत्पादन बाजार तक जाता और लोगों की आय भी बढ़ती।
- विशन सिंह भंडारी।
ठांगा ग्राम पंचायत का अब तक तीन बार भ्रमण कर चुका हूं। ठांगा तुषरेड़ा गांव को प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से से जोड़ने का प्रस्ताव है। गांव खातीगांव देवतोली नरगोली तुुषरेड़ा सड़क के नाम से जुड़ेगा। संबंधित विभागों के अधिकारियों को हर समस्या का समाधान प्राथमिकता के आधार पर करने के निर्देश दिए हैं।
- ललित फर्स्वाण, विधायक, कपकोट।