गुजरता मानसून अपने पीछे आपदा के जख्म छोड़ गया है। जिले के कई गांव और तोक इस साल की बारिश के बाद खतरे की जद में हैं। कर्मी ग्राम पंचायत के तल्ला सापुली तोक का अस्तित्व भी खतरे में है। मोटर मार्ग से गांव की ओर जमीन का कटाव बढ़ रहा है और पीछे से भूं-धसाव हो रहा है। करीब डेढ़ किमी के दायरे में बने सभी घरों में दरारें पड़ चुकी हैं। गांव में रहने वाले 10 परिवार खतरे के साये में जीने के लिए मजबूर हैं।
जिला मुख्यालय से करीब 45 किमी दूरी पर बसे तल्ला सापुली तोक में पिछले तीन साल से भू-धंसाव हो रहा है। कर्मी मोटर मार्ग से भूस्खलन के चलते गांव का पैदल रास्ता भी ध्वस्त हो चुका है। फिसलन भरे पहाड़ी से किसी तरह गांव के रास्ते तक जाना पड़ रहा है। गांव के पीछे से जमीन नीचे की ओर धंस रही है। गांव पहुंची संवाद टीम को ग्रामीणों ने बताया कि गांव धीरे-धीरे धंस रहा है। जल्द सुध नहीं ली तो एक दिन हम और हमारा तोक इतिहास बन जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क से हो रहे कटाव के चलते गांव को खतरा पैदा हो गया है। कुछ समय पहले ग्रामीण सड़क पर जेसीबी से खोदाई करने के विरोध में प्रदर्शन भी कर चुके है।
अधिकतर घरों में बुजुर्ग और बच्चे, युवा शहरों में
तल्ला सापुली गांव में इक्का-दुक्का घर में ही युवा हैं। अधिकांश घरों में बुजुर्ग या बच्चे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि युवा रोजगार के लिए महानगरों में हैं। गांव में उनके माता-पिता, पत्नी और बच्चे डर के बीच जीवन यापन कर रहे हैं।
गांव में तीन-साल साल से दरारें पड़नी शुरू हुई थीं। इस साल काफी अधिक नुकसान हो गया है। बारिश होने पर मकान के गिरने का डर बना रहता है। शासन-प्रशासन ने अब तक न मदद की है, न बचाव के लिए कोई काम किया है। - हंसी देवी, ग्रामीण
गांव का हर परिवार खतरे में है। बारिश होने पर जानमाल के नुकसान का डर सताता है। शासन-प्रशासन से मांग है कि ग्रामीणों को बचाने के लिए किसी सुरक्षित स्थान पर बसाया जाए। - भागीरथी, ग्रामीण
परिवार में पांच लोग हैं। पति बीमार हैं, लड़का मजदूरी करता है। एक मकान था, उसमें भी दरारें पड़ गई हैं। आंगन भी टूट रहा है। कोई सुध लेने वाला नहीं है। शासन-प्रशासन भी गरीबों की कहां सुनता है। - कुसुमा देवी, ग्रामीण
गांव के नीचे से गुजर रही सड़क क्षेत्र के विकास के साथ हमारे गांव के लिए विनाश लेकर आई है। भारी मशीनों से पहाड़ काटने से मकान क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। मेरे मकान में चौड़ी दरारें पड़ गई हैं। छत भी टेड़ी हो गई है। - हरीश सिंह कर्म्याल, ग्रामीण
खेत, खलिहान, पहाड़ सब जगह दरारें पड़ रही हैं। एक भी मकान सुरक्षित नहीं है। राजस्व उपनिरीक्षक गांव आकर मुआयना करके गए लेकिन अब तक कोई मदद नहीं मिली है। धीरे-धीरे गांव की जमीन धंसती जा रही है। - उमराव सिंह, ग्रामीण
भूस्खलन होने पर हर साल भारी मशीन से गांव की ओर खोदाई की जाती है जिससे जमीन धंस रही है। यही हाल रहा तो दो-तीन साल में सापुली तोक खत्म हो जाएगा। शासन-प्रशासन को समय रहते ग्रामीणों की मदद करने चाहिए। - नारायण सिंह कर्म्याल, सामाजिक कार्यकर्ता
तल्ला सापुली गांव में भू-धंसाव का संज्ञान लेते हुए प्रशासन ने गांव का निरीक्षण किया था। इसके बाद भूगर्भीय सर्वेक्षण को लिखा गया है। भू-वैज्ञानिकों की सर्वे रिपोर्ट के बाद विस्थापन या ट्रीटमेंट किया जाएगा। - डॉ. ललित मोहन तिवारी, एसडीएम, कपकोट