बागेश्वर के दोफाड़ गांव में मनमोहन की डेयरी में मौजूद गायें। संवाद न्यूज एजेंसी
- फोटो : AMAR UJALA
बागेश्वर। पहाड़ के युवा चंद रुपयों की नौकरी की खातिर बाहरी प्रदेशों की खाक छानते हैं। युवाओं के पलायन से गांव के गांव खाली हो गए हैं। लॉकडाउन में घर लौटे प्रवासियों की तादाद पलायन की भयावहता के दर्शन करा रही है। ऐसे में एक फौजी ने रिटायरमेंट के बाद घर में ही डेयरी खोलकर अन्य लोगों को स्वरोजगार की राह दिखाई है। जिले के दोफाड़ गांव के रिटायर्ड फौजी मनमोहन सिंह कालाकोटी 30 अक्तूबर 2018 को सेना से सेवानिवृत्त हुए। अपनी माटी से मोह ऐसा कि लखनऊ में मकान होने के बाद भी उन्होंने अपने गांव को नहीं छोड़ा। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने 24 जुलाई 2019 से गांव में ही डेयरी व्यवसाय शुरु किया। अभी उनके पास अच्छी नस्ल की 6 गाय हैं। वह रोजाना दोफाड़, नौघर समेत आसपास के गांवों में 25 लीटर से अधिक दूध की सप्लाई करते हैं। साथ ही डिमांड पर दही, मट्ठा और घी लोगों तक पहुंचाते हैं। खुद ही गायों के लिए चारे की व्यवस्था करते हैं। इस व्यवसाय से वह 25 हजार रुपये से अधिक हर माह आय अर्जित कर रहे हैं। मनमोहन सिंह कालाकोटी ने बताया कि डिमांड को देखते हुए डेयरी में गायों की संख्या बढ़ाकर गांव के अन्य लोगों को भी इससे जोड़ने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने मुर्गी पालन और मत्स्य पालन का कार्य भी शुरू कर दिया है। मनमोहन सिंह कालाकोटी से पहाड़ के युवाओं को प्रेरणा लेनी चाहिए और स्वरोजगार की ओर कदम बढ़ाने चाहिए।
रिटायर्ड फौजी मनमोहन सिंह कालाकोटी।
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रिटायर्ड फौजी मनमोहन सिंह कालाकोटी।