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सम्मान, शक्ति, शौर्य, ऐश्वर्य, लक्ष्मी, सरस्वती का प्रतीक है नारी

Sat, 09 Mar 2019 12:09 AM IST
Almora desk अमर उजाला ब्यूरो बागेश्वर।
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अपराजिता मुहिम के तहत सम्मानित महिलाएं। - फोटो : amar ujala
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अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर अमर उजाला अपराजिता-100 मिलियन स्माइल्स के तहत प्रशासन, खेल, चिकित्सा, शिक्षा, उद्यम, राजनीति, न्यायिक, सामाजिक कार्य के क्षेत्र में अपना अलग मुकाम बनाने वाली आठ अपराजिताओं को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि नारी सम्मान, शक्ति, शौर्य, ऐश्वर्य, लक्ष्मी और सरस्वती का प्रतीक है। 

शुक्रवार को नुमाइश  खेत स्थित आशीर्वाद भवन में सम्मान समारोह का शुभारंभ जिलाधिकारी रंजना राजगुरु ने किया। उन्होंने कहा कि बेटा-बेटी के जन्म पर भेदभाव बंद करना चाहिए। बेटियां सभी क्षेत्रों में मां पिता का नाम रोशन कर रही हैं। कांग्रेसी नेता सज्जन लाल टम्टा ने कहा कि आधी आबादी पूरे ब्रह्मांड की जननी है। सभी को नारी का सम्मान करना चाहिए। समारोह संचालन शिक्षक डॉ. गोपाल कृष्ण जोशी ने किया। वहां पूर्व कनिष्ठ प्रमुख सुनीता टम्टा, डॉ. पीके दुबे, एसडीएम राकेश तिवारी, डीएसओ अरुण वर्मा, ईओ राजदेव जायसी, पुष्पा आर्या, जेएसएस निदेशक डॉ. जितेंद्र तिवारी, कोच कमलेश तिवारी, महिला समिति के उर्मिला बिष्ट, प्रेमा उपाध्याय, नीमा दफौटी, प्रियंका गस्याल, मनीषा कनवाल, अंजू नगरकोटी, चंद्रा उपाध्याय, लक्ष्मी धर्मशक्तू, पार्वती पांडे आदि मौजूद थीं। 
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ये हुईं सम्मानित
1. डीएम रंजना राजगुरु - कुशल प्रशासन
2. डॉ. शमी उन्निसां- चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं 
3. गीता रावल - कुशल राजनीतिज्ञ
4. इंदिरा दानू - विशिष्ट न्यायिक कार्य
5. डॉ. मंजू बोरा - शिक्षा क्षेत्र
6. विशाखा साह - खेल 
7. निशा लूथरा-  उद्यम एवं कारोबार
8. सखी स्वायत्त सहकारी समिति - कुछ अलग

जरा सुधर सुधर जरा संभल संभल ...
अपराजिता सम्मान समारोह में बीडी पांडे डिग्री कालेज की हिमांशी देव ने सेव गर्ल चाइल्ड पर सोलो परफार्मेंस दी। इसके बाद कॉलेज की टीम ने स्वच्छता पर नुक्कड़ नाटक कर लोगों से घर, शहर, समाज को साफ रखने की अपील की। बीएड विभाग की छात्राओं ने महिला हिंसा पर बेहतरीन नाट्य प्रस्तुति देकर महिला अपराधों पर करारा प्रहार किया। इन्हें सभासद नीमा दफौटी और सज्जन टम्टा ने 500-500 रुपये का नगद पुरस्कार भी दिया। योग के बच्चों ने सूर्य नमस्कार की प्रस्तुति दी। वहां सांस्कृतिक सचिव प्रियंका गस्याल, रमेश, तनुजा खेतवाल, सुशील, रवीना, गरिमा, रोहित, हिमांशी, मनीषा, रमेश, राजेंद्र, विनय, भावना, अनीता, पुष्पा, पूर्णिमा, लीला, ललिता आदि थे।

कोट
- महिलाओं के प्रति समाज को मानसिकता बदलने की आवश्यकता है। उन्हें दया की नहीं बल्कि समर्थन की जरूरत होती है। - रंजना राजगुरु, डीएम 
- चिकित्सा सेवा को दुरुस्त करने की आवश्यकता है। चिकित्सा सेवा खराब होने से महिलाओं को सबसे ज्यादा नुकसान होता है। - डॉ शमी उन्निसां, चिकित्सक
- महिलाओं को राजनीति दिया जाना चाहिए। घर संभालने में माहिर महिलाएं प्रशासन व राजनीति भी कुशलता से चला सकती हैं। -  गीता रावल, पूर्व पालिकाध्यक्ष
-  पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने में विधि क्षेत्र की अहम भूमिका है। जानकारी के अभाव में कई कानूनों का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। - इंदिरा दानू, अधिवक्ता
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- योग को रोजगार से जोड़ते हुए महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है। योग विभाग इसी दिशा में कार्य कर रहा है।  - डॉ मंजू बोरा, शिक्षक 
- महिला खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक मदद दी जानी चाहिए। मदद दी जाए तो छात्राएं मुकाम हासिल कर सकती हैं। - विशाखा साह, खिलाड़ी
- उद्योग के क्षेत्र में भी महिलाओं ने खुद को साबित किया है। गांवों में खेती को व्यवसायिक रूप देकर महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं। - निशा लूथरा, उद्यमी

 
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