अध्यापकों के शिक्षण अभ्यास और व्यवहार का होता है मूल्यांकन
बागेश्वर। सरकारी स्कूलों में शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए शिक्षकों को जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान (डायट) समय-समय पर प्रशिक्षण देने के साथ-साथ क्रियात्मक शोध भी कराता है। शोध के माध्यम से शिक्षण अभ्यास और विद्यालयी प्रक्रिया के विविध व्यवहारों का मूल्यांकन किया जाता है। इससे शिक्षकों में आत्मचिंतन और सुधार की प्रवृत्ति का विकास होता है।
डायट के नियोजन, प्रबंधन विभाग के प्रवक्ता कैलाश प्रकाश चंदोला बताते हैं कि क्रियात्मक शोध शिक्षकों को समस्याओं का समाधान खोजने के लिए प्रेरित करता है। इससे उनमें नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और व्यावसायिक प्रतिबद्धता जैसी गुणों का विकास होता है। इस साल भी डायट के माध्यम से क्रियात्मक शोध कराए जाएंगे।
इन विषयों पर होते हैं शोध
शोध के विषय आमतौर पर कक्षा-कक्ष की वास्तविक समस्याओं या सुधार की संभावनाओं पर आधारित होते हैं। इनमें विद्यालयों में उपस्थिति बढ़ाने के उपाय, बहुभाषी कक्षा में हिंदी शिक्षण की प्रभावी रणनीतियां, ई-लर्निंग के प्रभाव और समाधान, कमजोर छात्रों के लिए गणित शिक्षण में सुधारात्मक उपाय, पुस्तकालय उपयोगिता बढ़ाने के उपाय आदि शामिल हैं।