बागेश्वर। सैनिक और अर्द्धसैनिक बलों के आश्रितों ने उत्तराखंड स्थानांतरण नीति में उनके साथ अन्याय करने का आरोप लगाया है। स्थानांतरण अधिनियम की धारा 7 (घ) 5 में सभी सैन्य और अर्द्धसैनिक बलों में कार्यरत कार्मिकों के जीवनसाथी अपने परिवार के नजदीक रहकर अपने परिवार बूढ़े सास-रासुर और बच्चों की देखरेख कर सकें। धारा में सिर्फ सुगम से दुर्गम आवश्यक स्थानांतरण में छूट का प्रावधान दिया गया है और दुर्गम से सुगम का प्रावधान नहीं होने से सैनिकों के परिवार को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सैनिक और अर्द्धसैनिक बलों के आश्रितों का कहना है कि सैन्य और अर्द्धसैन्य बलों के कार्मिकों के आश्रित विशेषकर महिलाओं को जिन्हें पहली ज्वाइनिंग ही दुर्गम में मिलती है। उन्हें सुगम में आने में 15 से 20 वर्ष का समय लग जाता है। कई ऐसी महिला कर्मी अपने सास-ससुर, छोटे बच्चों को छोड़कर दुर्गम में सेवा दे रही हैं ऐसी महिला कार्मिक तनाव की स्थिति में है। उन्होंने धारा 7 (घ) 5 में संशोधन कर सैन्य और अर्द्धसैन्य बलों के कार्मिकों को दुर्गम से सुगम स्थानांतरण में छूट देने की मांग की है। वहां पर सेवानिवृत्त निरीक्षक एसएसबी आनंद सिंह टंगड़िया, दरबान सिंह हरड़िया, नारायण सिंह हरड़िया,मोहन सिंह कपकोटी, धन सिंह डसीला, मोहन चंद्र लोहनी, रमेश हरड़िया मौजूद रहे।