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नौकरी गई पर हार नहीं मानी, घर पर खोल दिया डिस्पोजेबल सामग्री का कारोबार

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बागेश्वर के पाटली गांव में रमेश भट्ट की डिस्पोजेबल सामग्री की दुकान। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर। कोरोना काल में सभी लोग किसी न किसी रूप से प्रभावित हुए हैं। बागेश्वर के पाटली गांव निवासी रमेश भट्ट पांच साल से कर्नाटक की एक मोटर कंपनी में काम करते थे। लॉकडाउन के कारण उनकी नौकरी चली गई और वह मई 2020 में घर लौट आए। उन्होंने घर पर ही डिस्पोेजेबल बर्तनों का कारोबार खोल लिया। आज वह गांव के दो और युवाओं को रोजगार दे रहे हैं।
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लॉक डाउन के चलते पाटली गांव निवासी रमेश भट्ट (34) के घर लौटने के बाद उनकी आर्थिक स्थिति बहुत खराब हो गई। पूरा परिवार उन्हीं पर आश्रित था। उन्होंने डिस्पोजेबल प्लेट, कटोरी, गिलास बनाने के संबंध में जानकारी जुटाई। उन्होंने उद्योग विभाग में डिस्पोजेबल बनाने वाली मशीन खरीदने के लिए तीन लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया। आवेदन को स्वीकार कर लिया गया। मशीन के साथ अन्य जरूरी सामान लाकर उन्होंने घर पर ही डिस्पोजेबल बनाने का काम शुरू कर दिया।
रमेश आज परिवार के साथ इस काम में जुटे हैं। गांव के दो युवाओं को भी उन्होंने रोजगार दे रखा है। वह डिस्पोजेबल प्लेट, कटोरी, गिलास बना रहे हैं। डिस्पोजेबल सामग्री तैयार करने में केला पत्ता, सिल्वर पेपर आदि का प्रयोग कर रहे हैं और बचे हुए कचरे से खाद बना भी बना रहे हैं। वर्तमान में वह बागेश्वर, अल्मोड़ा, कपकोट, रीमा, गरुड़, काफलीगैर, ताकुला में थोक में डिस्पोजेबल सामग्री बेच रहे हैं। वह प्रति माह करीब डेढ़ लाख रुपये का सामान बेच रहे हैं और सारे खर्चे निकालने के बाद महीने में करीब बीस हजार रुपया बचा लेते हैं।
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