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सरकार रोजगार दे, हम नहीं जाएंगे बाहरी प्रदेशों की खाक छानने

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बागेश्वर के सिमकूना (कांडा) में स्कूल में क्वारंटीन किए गए लोग। संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : BAGESHWAR
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बागेश्वर/कांडा। कोरोना लॉकडाउन के कारण रोजी-रोटी की तलाश में बाहरी राज्यों में जिले के युवाओं की नौकरी छिन गई है। करीब डेढ़ महीने तक पंजाब, हरियाणा में फंसे युवक सकुशल अपने घर तो पहुंच गए लेकिन अब इन लोगों को भविष्य की चिंता सता रही है। खाली हाथ घर लौटे यह युवा अब बाहरी प्रदेशों की खाक छानना नहीं चाहते। इन लोगों का कहना है कि सरकार घर में रोजगार दिलाए तो वह हरसंभव प्रयास करेंगे।
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बृहस्पतिवार को अमर उजाला ने जिला मुख्यालय से 39 किमी दूर कांडा तहसील के सिमकूना और नाघर माजिला में क्वारंटीन का जायजा लिया। सिमकूना में 14 और नाघर माजिला में सात लोगों को क्वारंटीन किया गया है। वहां ठहरे युवाओं ने अपने भविष्य की योजना बताई। उन्होंने क्या कहा? आप भी जानिए-
अंबाला के एक होटल में 12 हजार रुपये के मासिक वेतन पर काम करता था। 21 मार्च के बाद होटल बंद हो गया। तब से अंबाला में फंसा था। उसके बाद की अवधि का वेतन नहीं मिला। मालिक ने भोजन की व्यवस्था अवश्य की। अब तो घर पर ही रहकर काम करना चाहता हूं।
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- प्रमोद कुमार, ग्वाड़ी (सिमकूना)
हिसार हरियाणा के एक होटल में काम करता था। लॉकडाउन के बाद होटल बंद हो गया। होटल की नौकरी से परिवार का खर्चा चलता था। नौकरी भी नहीं रही। सरकार यदि गांव में रोजगार के अवसर दिला दे तो वह अब बाहर नहीं जाएंगे।
- विजय कुमार, ग्राम सिमकूना
गुरुग्राम के एक होटल में कई वर्षों से काम करता था। लॉकडाउन ने काम छीन दिया। उसके बाद होटल मालिक ने भी वेतन नहीं दिया। डेढ़ महीने तक वहीं फंसा रहा। राज्य सरकार ने घर आने की व्यवस्था की। अब रोजगार भी दे दे तो यहीं रहूंगा।
- पवन कुमार, सिमकूना
हिसार हरियाणा के एक होटल में काम करता था। महीने में कुछ पैसे बचाकर घर भी भेजता था। लॉकडाउन के बाद नौकरी चली गई। डेढ़ महीने तक वहीं फंसा रहा। काफी परेशानी झेली। अब वहां नहीं जाना चाहता। सरकार रोजगार के लिए संसाधन उपलब्ध कराए।
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- दीवान राम, सिमकूना
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