वनों को आग से बचाने के लिए वन विभाग ने कंट्रोल बर्निंग शुरू कर दी है। इसके तहत चीड़ के जंगलों में गिरे पिरूल जलाया जा रहा हैं। विभाग के अनुसार इससे गर्मी के सीजन में वनों में आग का खतरा काफी हद तक कम हो जाएगा।
बागेश्वर जिले का कुल रिजर्व वन क्षेत्रफल 66236.2 हेक्टेयर, पंचायती वन 38782.92 हेक्टेयर और निजी व गोचर वन 155.64 हेक्टेयर है। इसमें सर्वाधिक चीड़ के वन हैं। भारी मात्रा में पिरूल गिरने के कारण गर्मियों में इन वनों में भीषण आग लगती है। इससे करोड़ों की वन्य संपदा जलकर स्वाहा हो जाती है। इससे पर्यावरण को भी भारी नुकसान पहुंचता है। इसको देखते हुए वन विभाग की ओर से 15 फरवरी से 15 जून तक फायर सीजन घोषित किया जाता है। फायर सीजन में वनों को आग से बचाने के लिए वनों में विभागीय कर्मचारियों, फायर वाचरों की तैनाती की जाती है।
इसके बावजूद भी हर साल सैकड़ों हेक्टेयर क्षेत्रफल में वन संपदा जलकर नष्ट हो जाती हैं। इसको देखते हुए वनों को आग से बचाने के लिए इस बार वन विभाग ने अभी से बर्निंग कंट्रोल शुरू कर दिया है। वन दरोगा प्रयाग भट्ट ने बताया कि बर्निंग कंट्रोल में चीड़ के वनों में ऊपर से नीचे की ओर आग लगाई जा रही है। उन्होंने बताया कि इसमें केवल सूखी घास और पिरूल को ही जलाया जा रहा है। डीएफओ एमबी सिंह ने बताया कि बर्निंग कंट्रोल के बाद फायर सीजन में वनों में आग लगने की घटनाओं में कमी आती है। वनों की सुरक्षा के लिए बर्निंग कंट्रोल जरूरी होता है। उन्होंने बताया कि सभी रेंजों के अधिकारियों को बर्निंग कंट्रोल के निर्देश दिए गए हैं।