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UK: हाईवे का सीना चौड़ा करने के लिए हजारों पेड़ों को चीरेंगी आरियां, 6911 वृक्षों के कटान की तैयारी

Mon, 08 Dec 2025 01:41 PM IST
हीरा मेहरा कमल कांडपाल

सार

बागेश्वर-कांडा एनएच को बागेश्वर जिला मुख्यालय से घिंघारूतोला तक फरटिदार बनाने के लिए हजारों पेड़ काटे जाने का फरमान सरकारी फाइलों में लिख दिया गया है। हिमालयी वनस्पतियों के 36 प्रजातियों के कुल 6911 पेड़ों पर वन विभाग ने छपान प्रक्रिया पूरी कर ली है।
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जंगल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बागेश्वर जिले में विकास के नाम पर एक बार फिर प्रकृति लहूलुहान होने जा रही है। बागेश्वर-कांडा राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच 309 ए) को बागेश्वर जिला मुख्यालय से घिंघारूतोला तक फरटिदार बनाने के लिए हजारों पेड़ काटे जाने का फरमान सरकारी फाइलों में लिख दिया गया है। हिमालयी वनस्पतियों के 36 प्रजातियों के कुल 6911 पेड़ों पर वन विभाग ने छपान प्रक्रिया पूरी कर ली है।

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लॉट आवंटित होते ही आरियां चलेंगी और हाईवे का सीना चौड़ा हो जाएगा। कांडाधार से धिंघारूतोला तक होने वाले इस कटान में केवल साधारण पेड़ ही नहीं बल्कि उत्तराखंड की पहचान मानी जाने वाली कई महत्वपूर्ण और दुर्लभ प्रजातियां भी शामिल हैं। कटान की जद में बेडू जैसी दुर्लभ प्रजाति के पेड़ आ रहे हैं। तुन जैसे बहुमूल्य पेड़ पर भी छपान किया गया है। बांज को जल स्रोतों के संरक्षण, मिट्टी के कटाव को रोकने और जैव विविधता के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है। इस प्रजाति के भी 73 पेड़ काटे जाएंगे। चीड़ के भी हजारों पेड़ इस परियोजना में कटने तय हैं। इस पूरे कटान के लिए खामोशी से चली प्रक्रिया और अनुमति पर सवाल उठ रहे हैं। 

बागेश्वर से धिंघारूतोला एनएच निर्माण में जो पेड़ कटान की जद में हैं, उनका छपान कर दिया गया है। लॉट आवंटन की प्रक्रिया जारी है। इसके बाद कटान शुरू होगा। काटे गए पेड़ों की क्षतिपूर्ति के लिए पचार और वज्यूला में चार गुना पौधरोपण किया जाएगा। आदित्य रत्न, डीएफओ बागेश्वर
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कांडाधार से मनकोट तक भूस्खलन जोन है। पेड़ कटेंगे तो मंडलसेरा की 25 हजार की आबादी में भी भूस्खलन का खतरा बढ़ेगा। यहीं पौधरोपण होना चाहिए। इसी सड़क के किनारे बांस, बांज के पौधे रोपे जाने चाहिए। ठेकेदार को पौधों की सुरक्षा की जिम्मेदारी देनी चाहिए। किशन सिंह मलड़ा, वृक्षपुरुष, बागेश्वर

आशंका : बिगड़ सकता है बारिश का पैटर्न

हजारों पेड़ों के एक साथ कटने से क्षेत्र के पर्यावरण संतुलन पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है। इससे ग्लोबल वार्मिंग, भूस्खलन और वर्षा के पैटर्न पर भी असर पड़ना तय माना जा रहा है। बांज के पेड़ को उत्तराखंड के जल स्रोतों को रिचार्ज करने, मिट्टी का कटाव रोकने और स्थानीय जैव विविधता को बनाए रखने के लिए जाना जाता है।

इतने पेड़ कटेंगे-
शहतूत-08, फल्यांट-19, तिमिल-90, नाशपाती-18, भीमल-118, उतीस-01, पदम-02, खिणुवा-24, मोरपंखी-02, छरंडा-04, सुरई-24, साधन (सानड़)-04, आम-104, रीठा-18, क्वैराल-91, माल्टा- 04, अखरोट-11, पांगर-04, देवदार-09, मेहल-10, तिमूर-01, च्यूरा-04, अमरूद-03, दाड़िम-14, खड़क-26, बोतल ब्रश-01, नींबू-09, जामुन-03, काफल-18, तेजपत्ता-01, सेमल-01, गेठी-12, बांज-73, बेडू-4, तुन-1, चौड़-6175। कुल पेड़ः 6911

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