बागेश्वर (कालिका रावल)। सरकारी अनदेखी का आलम यह है कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद से जिले के प्रसिद्ध पिंडारी ग्लेशियर ट्रैकिंग रूट की दशा नहीं सुधरी। ऐसे में यहां आने वाले ट्रैकर निराश हैं। आठ वर्ष पहले यह ट्रैकिंग रूट द्वाली नामक स्थान पर बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। चट्टान को काटकर रास्ता बनाया जा रहा है। बजट के अभाव में रास्ते का काम ठप है।
वर्ष 2013 की आपदा में पिंडारी ग्लेशियर ट्रैकिंग रूट का रास्ता नदी में समा गया था। चट्टान काटकर रास्ते का निर्माण किया जा रहा है। इसके लिए शासन से 24 लाख रुपये स्वीकृत हुए थे। करीब 300 मीटर रास्ता बना लिया गया है, जबकि 700 मीटर रास्ते का निर्माण और होना है। पर समस्या यह है कि बजट समाप्त होने से रास्ते का निर्माण रुक गया है। रास्ता नहीं बनने से स्थानीय लोगों को तो परेशानी हो ही रही है, साथ ही यहां ट्रैकिंग पर आने वाले लोगों की राह भी आसान हो जाती। लोगों का कहना है कि कब ट्रैकिंग रूट सही होगा और कब ट्रैकिंग परवान चढ़ेगी पता नहीं इस सवाल का जवाब कब मिलेगा।
गेस्ट हाउस भी खतरे की जद में
बागेश्वर। लोनिवि का गेस्टहाउस पिंडर नदी के कटाव से खतरे की जद में है। वर्ष 2013 में पिंडर और कफनी नदी में बाढ़ आने से द्वाली स्थित लोनिवि के गेस्टहाउस को गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया था। नदी के कटाव से गेस्टहाउस के पास तक की जमीन नदी में समा गई है। गेस्टहाउस की जमीन को कफनी नदी से अधिक नुकसान हुआ है। सरकार और लोनिवि 8 वर्ष बीतने के बाद भी गेस्टहाउस को बचाने के लिए सुरक्षा उपाय नहीं कर पाया है।
पहली बारिश में बह गए अस्थायी पुल, आवागमन में दिक्कत
बागेश्वर। हर साल कफनी और पिंडर नदी में आवागमन के लिए लकड़ी के अस्थायी पुल बनाए जाते हैं। यह पुल भी बीते माह 18 तारीख की बारिश में बह गए हैं। खातीगांव निवासी तारा सिंह दानू ने बताया कि पुल बहने से लोगों को जान जोखिम में डालकर नदी पार करनी पड़ रही है। नदियों का जलस्तर बढ़ा तो आवागमन बाधित हो जाएगा। द्वारी में झूलापुल निर्माण के लिए 2.30 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत है। इस वर्ष अक्तूबर, नवंबर में झूलापुल का निर्माण कार्य पूरा होने की उम्मीद है।
डेढ़ सौ से अधिक पोर्टर, गाइडों का रोजगार प्रभावित
बागेश्वर। ट्रैकिंग रूट प्रभावित होने से वर्ष 2013 के बाद कभी भी ट्रैकिंग परवान नहीं चढ़ी। इसकी वजह से खाती और आसपास क्षेत्र के डेढ़ सौ से अधिक पोर्टर और गाइडों की रोजीरोटी पर असर पड़ा है। ट्रैकिंग रूट पर कई ढाबे हैं जो बंद पड़े हैं। जिला मुख्यालय से खर्किया तक 65 किमी की दूरी वाहन से तय की जाती है। खर्किया से द्वाली तक 5.5 किमी पैदल जाना पड़ता है। ट्रैकिंग रूट में द्वाली में ही सबसे अधिक दिक्कत है।
द्वाली में करीब 300 मीटर चट्टान को काटा जाना है। झूलापुल नवंबर तक बन जाएगा। झूलापुल बनने के साथ ही चट्टान से रास्ता बनाया जाएगा। द्वाली के लोनिवि के गेस्टहाउस को फिलहाल कोई खतरा नहीं है। - एसके पांडेय ईई लोनिवि कपकोट