बागेश्वर। मानसून सत्र के सक्रिय होने के साथ ही कपकोट के ग्रामीण क्षेत्रों में पुरानी आपदा के जख्म हरे होने लग गए हैं। क्षेत्र के कई गांव वर्षों से बारिश और बाढ़ का कहर झेल रहे हैं। इसके बावजूद इन गांवों में आपदा प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम नहीं होने से हर वर्ष लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। दूरस्थ गांव कालापैरकापड़ी के तोक भकुना मेें भी रामगंगा नदी पर तटबंध बनाने का काम शुरू नहीं हो सका। नदी से गांव की ओर भू कटाव बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों की कई नाली उपजाऊ जमीन नष्ट हो चुकी है। कटाव से नदी किनारे के घरों को भी खतरा पैदा हो गया है।
महरगाढ़ घाटी में जुलाई 2018 में अतिवृष्टि के बाद उफनाई रामगंगा के बहाव में आकर भकुना से नाचनी बाजार के बीच बना झूलापुल ध्वस्त हो गया था। किसानों की उपजाऊ जमीन भी बाढ़ की भेंट चढ़ गई। तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी नदी के कटाव को रोकने के लिए सुरक्षा के इंतजाम नहीं किए गए हैं। हर वर्ष बारिश होने पर नदी का बहाव गांव की तरफ हो जाता है। इससे उपजाऊ जमीन तो नष्ट हो ही रही है, नदी किनारे बसे गांव के लिए भी खतरा पैदा होने लगा है।
भकुना गांव में करीब 25 परिवार और 150 की आबादी रहती है। गांव के लोग नदी किनारे बसी जमीन पर खेतीबाड़ी करके जीवन यापन करते थे। अब नदी के बहाव से करीब 800 मीटर क्षेत्र में लगातार कटाव हो रहा है और उपजाऊ जमीन खत्म होती जा रही है। सामाजिक कार्यकर्ता बॉबी कुमार बताते हैं कि रामगंगा ने बागेश्वर के भकुना और पिथौरागढ़ के नाचनी बाजार की ओर बराबर कटाव किया था। पिथौरागढ़ की तरफ तत्काल सुरक्षा दीवार का निर्माण हो गया था। अब भी नदी से कटाव को रोकने के लिए उस तरफ सुरक्षा के इंतजाम किए जा रहे हैं, जबकि भकुना गांव की ओर तटबंध के नाम पर धेले भर का काम भी नहीं हुआ है।
ट्रॉली के सहारे नदी के आर-पार जा रहे ग्रामीण
बागेश्वर। महरगाढ़ घाटी के कालापैरकापड़ी, भकुना, नामतीचेटाबगड़, किसमिला, सुखचौना आदि गांवों की नजदीकी बाजार पिथौरागढ़ जिले की नाचनी है, जो रामगंगा नदी के उस पार है। रोजाना का सामान, राशन खरीदने, बैंक और डाकखाने के काम के लिए लोगों को नाचनी जाना पड़ता है। इसके लिए रामगंगा पर बना झूला पुल ही एकमात्र सहारा था। झूलापुल टूटने के बाद से लोग ट्रॉली के सहारे नदी पार करने के लिए मजबूर हैं। कई बार विभाग और विधायक को परेशानी बताने के बावजूद झूलापुल का निर्माण नहीं हो सका है।
पिछले तीन वर्ष से रामगंगा नदी से खेत बह रहे हैं, लोग मजबूर होकर अपनी जमीन जायदाद को बर्बाद होते देख रहे हैं। नदी किनारे दीवार तक नहीं बनी। प्रशासन और सरकार ने गांव की ओर आंखें फेर ली है। न गांव के रास्ते ठीक किए और न पेयजल योजनाओं की मरम्मत। नाचनी बाजार जाने के लिए बजट आने की बात कहने के बाद भी पुल नहीं बन सका। ग्रामीण परेशान हैं, देखने के लिए न तो अधिकारी आ रहे हैं और न ही विधायक। लोगों को उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। -खिमुली देवी, ग्रामीण भकुना
आपदा के बाद से प्रदेश में तीसरे मुख्यमंत्री बन गए हैं, झूलापुल अब तक नहीं बनाया गया। ग्रामीण लंबे समय से निविदा होने की बात सुनते आ रहे हैं। कटाव रोकने के लिए भी इंतजाम नहीं किए जा सके। आपदा के समय कई आश्वासन देने वाले नेताओं के अब दर्शन तक नहीं हो रहे। तटबंध नहीं बनने से किसानों के उपजाऊ खेत बहते जा रहे हैं। मानसूनी बारिश शुरू होने के बाद एक बार फिर से ग्रामीणों को अपने खेतों और नदी किनारे बसे मकानों को नदी के बहाव से खतरा पैदा हो गया है।- दीवान सिंह कार्की, ग्रामीण
कालापैरकापड़ी के भकुना तोक में रामगंगा नदी से हो रहे भूकटाव को रोकने के लिए विभाग को कोई प्रस्ताव अब तक नहीं मिला है। प्रस्ताव मिलने के बाद तटबंध बनाने के लिए जिला योजना या नाबार्ड से इस्टीमेट बनाया जाएगा। - एके जॉन, अधिशासी अभियंता, सिंचाई विभाग बागेश्वर।