कौसानी से पांच किमी दूर पिनाथ पहाड़ी पर स्थित पिनाकेश्वर मंदिर।
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। कौसानी की पिनाथ पहाड़ी पर स्थित पिनाकेश्वर मंदिर लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि चतुर्दशी और पूर्णमासी की रात निसंतान महिलाएं हाथ में दीया लेकर यदि मंदिर में पूजा अर्चना करें तो उनको संतान की प्राप्ति होती है।
कौसानी से पांच किमी की दूरी पर मठ कांटली नामक स्थान है। यहां से पांच किमी की खड़ी चढ़ाई पर पिनाथ पहाड़ी है। इसी पहाड़ी पर पिनाकेश्वर मंदिर है जिसमें ब्रह्मा, बिष्णु, महेश स्थित है। जहां पहुंचने के लिए 365 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। बताया जाता है कि इस मंदिर का निर्माण सन 1454 में चंद राजा के वंशज बाज बहादुर चंद ने करवाया था। जिस पर उन्हें पुत्र की प्राप्ति हुई थी। इसके बाद उन्होंने 27 गांवों का लगान माफ कर उन्हें मंदिर की पूजा अर्चना व देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी।
कांटली, पच्चीसी, रौल्याना के लोग मंदिर में पूजा अर्चना के लिए तेल की व्यवस्था करते हैं। कत्यूर घाटी, बोरारो घाटी और गेवाड़ पट्टी के लोगों को मंदिर में भोग के अलावा अन्य जिम्मेदारियां सौंपी गई। मंदिर की खासियत यह है कि इसमें प्रवेश के लिए तीन प्रवेश द्वार हैं। कहा जाता है कि इन प्रवेश द्वारों का निर्माण अलग-अलग घाटियों के लोगों के प्रवेश के लिए किया गया। मंदिर में एक चांदी का नींबू भी है। इस मंदिर में प्रतिदिन खिचड़ी व हलुवा का भोग लगाया जाता है। मंदिर के समीप ही दो नौले हैं जिनमें लबालब पानी भरा रहता है। मान्यता है कि चतुर्दशी और पूर्णमासी की रात मंदिर में यदि निसंतान महिला हाथ में दीपक लेकर पूजा करे तो उसे संतान प्राप्ति होती है। इस मंदिर में पूर्णमासी की रात बले गांव के लोग ढ़ोल-नगाड़ों के साथ पहुंचते हैं और रात्रि 12 बजे पूजा करते हैं। कांटली के कांडपाल, टोटा सिलिंग के जोशी और रावल जाति के लोग मंदिर के पुजारी नियुक्त किए गए हैं।
पिनाकेश्वर मंदिर में 13 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा का मेला लगेगा। यह मेला 14 नवंबर तक चलेगा। मंदिर के पुजारी किशन सिंह ने बताया कि दो दिन तक आयोजित होने वाले मेले को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न किए जाने को लेकर सभी से सहयोग की अपील की गई है। मंदिर में मेले के दौरान शांति व्यवस्था के लिए जिला व पुलिस प्रशासन को भी पत्र भेजा गया है।