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Bageshwar News: पुंगरघाटी के लोगों ने 200 साल से संजो रखी रंगों की परंपरा

Thu, 21 Mar 2024 11:08 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बागेश्वर
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बागेश्वर के पुंगरघाटी के लोगों ने 200 साल पुरानी परंपरा को संजो रखा है। पुंगरघाटी के 13 गांवों
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बागेश्वर। बागेश्वर के पुंगरघाटी के लोगों ने 200 साल पुरानी परंपरा को संजो रखा है। पुंगरघाटी के 13 गांवों के लोग एक साथ होली का आयोजन करते हैं। पुंगरघाटी के वरिष्ठ होल्यार जशौद सिंह कालाकोटी बताते हैं कि उनके बुजुर्ग करीब 200 साल पहले मथुरा से होली की चीर लाए थे। तब से पुंगर घाटी के तेरह गांवों के लोग एक साथ होली का आयोजन करते हैं। रंगभरणी एकादशी को नारी गांव के हरज्यू मंदिर से होली गायन की शुरूआत होती है। इसके बाद बारी-बारी से सभी 13 गांवों में होली दल जाकर होली गायन करते हैं। यह सिलसिला होली की छलड़ी तक जारी रहता है।
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वरिष्ठ होल्यार 80 वर्षीय प्रताप सिंह कालाकोटी बताते हैं कि होली के दौरान तेरह गांवों के सभी घरों में होली गीतों का गायन होता है। होली के दौरान चार गांवों में रात्रि प्रवास किया जाता है। रात्रि प्रवास वाले गांवों में सभी गांवों के लोग एकत्र होते हैं। प्रत्येक गांव के मंदिर में गुड़ की भेली चढ़ाई जाती है। फिर प्रसाद के रूप में गुड़ वितरित किया जाता है। हर गांव में होल्यारों का स्वागत आलू और चाय से किया जाता है।


नई पीढ़ी संभाल रही विरासत

बागेश्वर। बुजुर्गों की विरासत को पुंगरघाटी के युवा संभाल रहे हैं। हरज्यू मंदिर नारी के पुजारी जगत सिंह कालाकोटी, सामाजिक कार्यकर्ता हरीश कालाकोटी कहते हैं कि गांव के युवाओं में होली को लेकर अच्छा रुझान है, जो सुकून की बात है। गांव के युवा होल्यार प्रकाश सिंंह, कुंदन सिंह, हिमांशु, मनमोहन, नरेंद्र, राजेश, रोहित, लक्ष्मण कहते हैं कि बुजुर्गों की देन सामूहिक होली को हमेशा संजोये रखेंगे। संवाद
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सामूहिक होली वाले 13 गांव

नारी, नांघर, कमद, पलायन, पढ़ाई, नौगांव, कहाली, दोफाड़, ठांगा, ककड़ात, छातीखेत, अनेरिया, झनकोट।



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