पांच सौ और एक हजार रुपए के नोटों के बंद होने से पैदा हुई दिक्कत समाप्त होने का नाम नहीं ले रही है। पहले लोग बड़े नोट जमा करने के लिए परेशान रहे तो अब बड़े नोट के छुट्टे नहीं मिलने से परेशान हैं। सबसे ज्यादा दिक्कतें उन ग्रामीणों को उठानी पड़ रही है जिनका केवल पोस्टआफिस में ही खाता है। घरों में रखे नोट तो उन्होंने पोस्टआफिस में जमा कर दिए लेकिन करेंसी नहीं होने से बदले में उन्हें एक रुपया तक नहीं दिया गया। ऐसे में ग्रामीणों के घरों के चूल्हे उधारी से जल रहे हैं।
अमर उजाला ने सोमवार को कपकोट विकासखंड मुख्यालय से लगभग 10 किमी दूर फरसाली गांव पहुंचकर नोटबंदी के कारण पैदा हुई समस्याओं का जायजा लिया तो हर ग्रामीण परेशान नजर आया। बैंक में पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट जमा करने के बाद ज्यादातर ग्रामीणों के पास एक फूटी कौड़ी तक नहीं है। किसी को यदि काफी मशक्कत के बाद दो हजार का नोट मिला भी है तो उसे दुकानों में उसके छुट्टे नहीं मिल रहे हैं। गांवों व कस्बों में दुकान चलाने वाले दुकानदार भी लोगों को उधार देने को मजबूर हैं। अधिकांश ग्रामीण दुकानों से उधार ही सामान ले जाकर चूल्हा जला रहे हैं।
फरसाली गांव में सबसे पहले नंदिनी देवी से मुलाकात हुई। जब उनसे पूछा कि पांच सौ और एक हजार रुपए के नोट बंद होने से उन्हें कोई परेशानी तो नहीं हो रही तो उन्होंने बताया कि जो भी रुपए उनके घर में थे पोस्ट आफिस में जमा कर दिए। अब उनके पास एक रुपया नहीं हैं। सभी सामान दुकान से उधार ले रहे हैं।
ललिता देवी के घर पहुंचकर जब उनसे बातचीत की तो उन्होंने भी खाली हाथ होने की बात कही। उन्होंने बताया कि बैंक में उनका खाता नहीं है। पोस्टआफिस में रुपए नहीं हैं। गांव की दुकान से उधार सामान ला रहे हैं। अन्य खर्चों के लिए भी रुपए नहीं हैं।
मोहन सिंह ने बताया कि उनका भी पोस्टआफिस में खाता है। पांच सौ और एक हजार रुपए के जो नोट उनके पास थे पोस्टआफिस में जमा कर दिए हैं। दो हजार रुपए का नोट उनके पास है लेकिन जिस दुकान में भी सामान लेने जा रहा हूं छोटे नोट नहीं होने के कारण जेब में ही पड़ा है। सामान उधार ही ले रहे हैं।
ग्रामीण मदन राम ने भी पोस्ट आफिस से रुपए नहीं मिलने की बात कही। उन्होंने बताया कि पोस्टआफिस में रुपए नहीं हैं। जो रुपया जमा किया था उसके बदले अभी तक रुपए नहीं मिले हैं। किसी तरह से घर चल रहा है।
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फरसाली में दुकान चलाने वाले राजेंद्र सिंह कोश्यारी से जब नोटबंदी के बारे में पूछा तो उन्होंने बताया कि जो भी ग्रामीण सामान खरीदने आ रहे हैं या तो खाली हाथ आ रहे हैं या फिर दो हजार रुपए के नोट के साथ। दो हजार रुपए के नोट का उन्हें अभी अंदाजा नहीं है। फिर दो सौ रुपए के सामान पर 1800 रुपए लौटाने के लिए सौ-सौ के नोट नहीं हैं। जो भी ग्रामीण आ रहे हैं उन्हें उधार सामान दे रहा हूं।