बागेश्वर। हिमालयी क्षेत्र से सटे बोरबलड़ा में नियमित रूप से एएनएम के न आने का मामला सामने आया है। इसके चलते बोरबलड़ा के लोगों को बच्चे और गर्भवती महिलाओं को टीके लगाने के लिए 25 किमी पैदल चल कर बदियाकोट लाना पड़ रहा है।
गांव में बीते जून से एएनएम के नहीं आने से दिक्कतें बढ़ गई हैं। गांव के लोगों ने कहा कि बीते अप्रैल में बोरबलड़ा एएनएम केंद्र में अनुबंध के तहत एएनएम की नियुक्ति हुई। एएनएम जून तक केवल तीन बार एएनएम केंद्र में आईं हैं। एएनएम केंद्र का नियमित संचालन नहीं होने के कारण गांव के लोगों को मामूली समस्या की दवा तक नहीं मिल पा रही है।
गांव के लोगों का कहना है कि बदियाकोट-बोरबलड़ा निर्माणाधीन सड़क के 25 किमी हिस्से में से 12 किमी हिस्से में सड़क भूस्खलन से क्षतिग्रस्त पड़ा है। सड़क निर्माण से पैदल रास्ता क्षतिग्रस्त हो चुका है। पहले पैदल रास्ता सही था तो 15 किमी की दूरी तय कर बदियाकोट पहुंच जाते थे। अब सड़क क्षतिग्रस्त होने से पूरा 25 किमी पैदल चलना पड़ता है।
एएनएम वाहन से नियमित रूप से बोरबलड़ा जा रही हैं। बोरबलड़ा में दो एएनएम की रोटेशन में ड्यूटी लगा रखी है। हर बुधवार को एक एएनएम बोरबलड़ा जाती हैं। ग्रामीणों की बात का संज्ञान लेकर जानकारी जुटाई जाएगी। एएनएम को गांव भेजा जाएगा।
-डॉ. डीपी जोशी सीएमओ बागेश्वर
अप्रैल में दो दिन एएनएम बोरबलड़ा आईं। उसके बाद जून में एक बार एएनएम केंद्र में पहुंचीं। उसके बाद से एएनम बोरबलड़ा नहीं आईं। सड़क पैदल चलने लायक नहीं है। सीएमओ की एएनएम के नियमित बोरबलड़ा जाने की बात गलत है। प्रकरण की जांच होनी चाहिए। एएनएम सेंटर का नियमित संचालन होना चाहिए।
-हरीश दानू, विनोद दानू, अर्जुन सिंह, प्रवीण सिंह, पूजा दानू, कांति दानू, प्रेमा दानू-निवासी बदियाकोट।