बागेश्वर। बागेश्वर के रोडवेज डिपो की बसों की हालत खस्ता है। डिपो की अस्थायी कार्यशाला को संचालित करने के लिए पर्याप्त कर्मचारी भी नहीं हैं। डिपो प्रभारी फोरमैन के सहारे चल रहा है।
चार सितंबर 2022 को स्थापित बागेश्वर के रोडवेज डिपो की अस्थायी कार्यशाला में अब तक कर्मचारियों की पर्याप्त व्यवस्था नहीं हुई है। डिपो में स्थायी फोरमैन भी नहीं है। कार्यशाला में मैकेनिकल स्टाफ की संख्या 12 होनी चाहिए लेकिन तैनात केवल चार हैं। डिपो की कार्यशाला में इलेक्ट्रीशियन का पद रिक्त है। फिटर भी नहीं है। डिपो में टायर मैकेनिक, बॉडी मैकेनिक की तैनाती है।
अस्थायी कार्यशाला की अव्यवस्था का असर बसों के रखरखाव पर पड़ रहा है। डिपो की 18 में से आठ बस उम्र पूरी कर चुकी हैं। यानि कि आठ लाख किमी से अधिक चल चुकी हैं। बस खराब हो रही हैं। डिपो की दो बस काठगोदाम में खराब हैं। खराब बस की मरम्मत के लिए बागेश्वर के अस्थायी डिपो से मैकेनिक भेजना पड़ता है। इससे डिपो का कार्य प्रभावित होता है।
डिपो की कार्यशाला में कर्मचारियों की तैनाती के लिए परिवहन निगम के जीएम को प्रस्ताव भेजा गया है। डिपो की अधिकतर बस पुरानी होने से दिक्कत आ रही है। मार्च तक डिपो को नई बसें मिलने की उम्मीद हैं। -राजेंद्र कुमार, प्रभारी सहायक महाप्रबंधक बागेश्वर डिपो।