तहसील मुख्यालय को जोड़ने वाली चीराबगढ़-पोथिंग सड़क बदहाल है। सड़क में जगह-जगह पर गड्ढे व मलबा पड़े होने से वाहनों के संचालन में दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। लोग जान जोखिम में डालकर आवागमन कर रहे हैं।
आठ किमी लंबी चीराबगढ़-पोथिंग सड़क का निर्माण प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत वर्ष 2003 में किया गया था। तब लोगों को उम्मीद थी कि बेहतर आवागमन की सुविधा मिलेगी। परंतु निर्माण के 13 साल बाद भी सड़क बदहाल ही पड़ी है। सड़क में डामरीकरण तो दूर कई स्थानों पर सड़क की दीवारें तक ध्वस्त हो चुकी हैं।
कई स्थानों पर कलवर्ट बंद पड़े हैं पानी सड़क पर बह रहा है। बरसात के मौसम में नालों का पानी सड़कों में ही बहता है जिसमें अधिक बारिश होने पर दुपहिया वाहनों का संचालन तक नहीं हो पाता है। कहीं पर भी सड़क में पैराफीट नहीं हैं। जरा सी चूक होने पर सीधे सैकड़ों फीट गहरी खाई में गिरने का खतरा बना रहता है।
इन हालात में इस सड़क में हर दिन सैकड़ों लोग जान जोखिम में डालकर आवाजाही करते हैं। ग्रामीण सड़क सुधार की मांग को लेकर पिछले तीन माह से आंदोलनरत हैं परंतु अभी तक सड़क सुधार को लेकर कोई प्रयास नहीं हुए हैं। इसको लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। पोथिंग क्षेत्रवासियों ने शीघ्र सड़क का सुधार कर डामरीकरण नहीं करने पर आगामी विधान सभा चुनावों में सबक सिखाने की चेतावनी दी है।