मन में कुछ करने की इच्छा हो तो हर काम हो सकता है। सुदूरवर्ती जूनियर हाईस्कूल रौल्याणा के प्रधानाध्यापक नीरज पंत ने कुछ ऐसा ही करके दिखाया है । उन्होंने बच्चों के ज्ञानवर्धन के लिए स्कूल में अपने निजी संसाधनों से एक सुव्यवस्थित पुस्तकालय खोला है। बच्चे अब रोज पुस्तकालय में जाकर पुस्तकों का ज्ञान ले रहे हैं।
राजकीय जूनियर हाईस्कूल रौल्याणा विकास खंड मुख्यालय से 25 किमी दूर है। स्कूल के प्रधानाध्यापक नीरज पंत ने दो साल पूर्व इस स्कूल में पदभार गृहण करने के बाद पहले अभिभावकों को विश्वास में लिया। ग्राम प्रधान मदन गिरी और अभिभावकों का प्रधानाध्यापक को स्कूल में शिक्षा के अच्छे वातावरण के निर्माण के लिए हर संभव सहयोग मिला। स्कूल के बच्चों ने प्रधानाध्यापक और शिक्षकों की कड़ी मेहनत के चलते बच्चों ने जिला और प्रदेश स्तरीय प्रतियोगिताओं में अव्वल स्थान प्राप्त कर स्कूल का नाम रोशन किया।
प्रधानाध्यापक पंत ने बच्चों के ज्ञानवर्धन के लिए अपने संसाधनों से हाल ही में एक पुस्तकालय खोला है। उन्होंने ने एकलव्य प्रकाशन भोपाल से डेढ़ हजार की किताबें खरीदकर पुस्तकालय में रखी हैं। उनका कहना है कि पुस्तकालय किसी भाषा को सीखने और सिखाने में किताबों की महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि स्कूल में पुस्तकालय हो तो बच्चे सहजता से भाषा सीख लेते हैं। स्कूल के बच्चे अब हर रोज पुस्तकालय में पुस्तकों से ज्ञान लेते हैं। पुस्तकालय में दैनिक समाचार पत्र और चित्रकथाएं, बाल पत्रिका आदि पुस्तकें भी उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि पुस्तकालय को शीघ्र और विकसित किया जाएगा। जिला शिक्षा अधिकारी बेसिक आकाश सारस्वत ने बताया कि जूनियर हाईस्कूल जिले का पहला स्कूल है जहां स्कूल में पुस्तकालय है। उन्होंने जिले के अन्य स्कूलों के शिक्षकों से अपने- अपने स्कूल में पुस्तकालय खोलने को कहा है। ग्राम प्रधान रौल्याणा मदन गिरी ने बताया कि स्कूल में पुस्तकालय की स्थापना कर शिक्षक पंत ने बच्चों का दिल जीतने के साथ- साथ अभिभावकों का भी दिल जीता है।