बागेश्वर। पर्वतीय इलाकों के किसानों के लिए खुशखबरी है। विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने ऐसी गेहूं की किस्म खोजी है जो किसानों को एक ही फसल से दोहरा फायदा देती है। इस खास किस्म का नाम है बीएल-829 जो धीरे-धीरे जिले के खेतों में किसानों की पहली पसंद बनती जा रही है।
बीएल-829 की खासियत यह है कि बुवाई के बाद किसान को न सिर्फ भरपूर अनाज मिलता है बल्कि पौधों को दो बार हरे चारे के रूप में भी काटा जा सकता है। सामान्य गेहूं की तुलना में इसकी उपज लगभग दोगुनी होती है। यही वजह है कि कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर ने इस साल 50 से ज्यादा किसानों के खेतों में इसकी खेती का लक्ष्य रखा है।
वैज्ञानिकों के अनुसार असिंचित जमीन पर इसकी पैदावार 25-30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, जबकि सिंचित भूमि पर 40-45 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। वहीं सामान्य गेहूं की उपज इससे लगभग आधी होती है।
इसके अलावा एक हेक्टेयर खेत से किसान को 70 क्विंटल तक हरा चारा भी मिल जाता है। सबसे खास बात यह है कि इसमें पीला और भूरा रतुवा रोग नहीं लगता जिससे फसल सुरक्षित रहती है।
दूध उत्पादन में सहायक
किसानों का कहना है कि इस गेहूं का हरा चारा न सिर्फ मवेशियों की सेहत बेहतर करता है बल्कि दुग्ध उत्पादन भी बढ़ाता है। यही वजह है कि चारे की कमी झेल रहे किसान इसे अपनाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
कैसा है यह गेहूं?
-दाना हल्का कठोर, पौधों की ऊंचाई 80-100 सेंटीमीटर।
-बुवाई के 200-218 दिन बाद अनाज तैयार।
-अक्टूबर में बुवाई, और करीब 70-90 दिन बाद पहली कटाई चारे के लिए।
-पौधे फिर से बढ़कर बालियां निकालते हैं, जिससे अनाज की अच्छी पैदावार होती है।
कोट
द्विउद्देशीय बीएल-829 प्रजाति के गेहूं की खूबियां अब किसान समझने लगे हैं। जिले के तीनों विकासखंडों से इसकी मांग बढ़ रही है। मांग के सापेक्ष अधिक से अधिक किसानों को लाभान्वित करने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले वर्षों यह जिले में उगाई जाने वाली प्रमुख किस्म होगी।
- डॉ. राजकुमार, केंद्र प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र काफलीगैर