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बागेश्वर जिले में 16 साल बाद भी नहीं बना खेल स्टेडियम

Fri, 10 Mar 2017 09:09 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, बागेश्वर। 
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बागेश्वर डिग्री कॉलेज का मैदान - फोटो : अमर उजाला
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बागेश्वर। देश को कई राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी देने वाले इस जिले में खिलाड़ियों के खेलने के लिए एक अदद खेल मैदान तक नहीं है। उत्तराखंड राज्य बनने के 16 साल बाद भी यहां खेल स्टेडियम तक नहीं बन सका है। स्थिति यह है कि स्टेडियम के लिए भूमि तक चिन्हित नहीं की गई है।
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खिलाड़ी डिग्री कॉलेज के मैदान में ही किसी तरह खेलों का अभ्यास करते हैं। खेल स्टेडियम आदि खेल सुविधाएं न होने के कारण प्रतिभाएं पलायन करने को मजबूर हैं। जिला मुख्यालय में यह स्थिति है तो दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में तो हालात इससे भी ज्यादा खराब हैं।

एक तरफ प्रदेश में सरकारें खेलों को बढ़ावा देने की बात कहती हैं लेकिन दूसरी और जिले में खेलों की स्थिति बहुत खराब है। राज्य बने 16 साल बीत गए लेकिन यहां जिला मुख्यालय में खेल स्टेडियम तक नहीं बन सका है। खेल स्टेडियम न होने के कारण खेल प्रतिभाओं को खेलों का अभ्यास करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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खेल विभाग खेल मैदान के लिए काफी लंबे समय से भूमि तलाश रहा है लेकिन भूमि तक चिन्हित नहीं हो सकी है। खेल स्टेडियम न होने के कारण खिलाड़ी डिग्री कॉलेज के मैदान में ही खेलों का अभ्यास करते हैं। ताइक्वांडो, बैडमिंटन, टेबल टेनिस आदि खेलों का प्रशिक्षण सूरजकुंड स्थित इंडोर स्टेडियम में दिया जाता है।

जिला मुख्यालय में बॉक्सिंग, फुटबाल, बैडमिंटन, ताइक्वांडो, वॉलीबाल, खो-खो, कबड्डी, हॉकी, हैंडबाल, एथलेटिक्स, टेबल-टेनिस आदि खेलों का प्रशिक्षण दिया जाता है। इन खेलों में संविदा पर खेल प्रशिक्षक रखे गए हैं। नियमित खेल प्रशिक्षक न होने के कारण इसका असर खेल गतिविधियों पर पड़ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी गजेंद्र परिहार ने साउथ एशियन गेम्स में रजत पदक, केशर सिंह मेहता ने थाइलैंड, ढाका में हुई एशियन बॉक्सिंग प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीता था। जिले के कई खिलाड़ियों ने राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में पदक जीते थे। देश को कई राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी देने वाले इस जिले में खेल स्टेडियम समेत अन्य सुविधाएं न होने के कारण खेल प्रतिभाएं पलायन कर रही हैं।

बागेश्वर। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में खेल प्रतिभाएं खेतों में ही अभ्यास करने को मजबूर हैं। बेहतर खेल संसाधन न होने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ पाती हैं। खेलने के लिए उचित मैदान न होने के कारण खिलाड़ी खेतों में ही अभ्यास करने को मजबूर हैं। 
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