शिकारी लखपत सिंह रावत ने बारिश के बीच रिठाड़ गांव से लगे जंगलों में रेकी की। मौसम साफ रहा तो रावत ने सोमवार की रात को गांव में रेकी करेंगे, हालांकि विभाग ने गांव में पिंजरा लगाया है लेकिन तेंदुआ पिंजरे की ओर नहीं आया। शासन से तेंदुए को मारने के आदेश शिकारी, वन विभाग के पास नहीं पहुंचा है।
तेंदुए ने तीन दिन पहले वन पंचायत रिठाड़ के सरपंच अर्जुन राणा की बच्ची कंचन को मार दिया था। जनाक्रोश को देखते हुए बागेश्वर के डीएफओ एमबी सिंह ने तेंदुए को आदमखोर घोषित करने के लिए उसी दिन वन्यजीव प्रतिपालक देेेहरादून को पत्र लिख दिया था। डीएम की रिपोर्ट पर शासन ने शिकारी लखपत सिंह को रिठाड़ गांव में मोर्चा संभालने के आदेश जारी किये। शिकारी रावत दो दिन से गांव में रेकी कर रहे है। उन्होंने बताया कि तेंदुए को पिंजरे में भी फंस सकता है। पिंजरे की दिशा भी जल्द बदल दी जाएगी। उन्होंने बताया कि तेंदुआ दो दिन से उनकी नजर में नहीं आया। शिकारी रावत ने बताया तेंदुआ अपने ठिकाने से अक्सर शाम छह बजे बाद निकलता है। सुबह साढ़े चार बजे के बीच ठिकाने को लौट जाता है। इस घटना के दिन से कत्यूर घाटी के लोग भयभीत हैं। ग्रामीण अपने बच्चों को शाम छह बजे बाद घर से बाहर नहीं भेज रहे है।
तेंदुए से सावधानी बरतें लोग : करायत
रेंजर श्याम सिंह करायत शिकारी लखपत सिंह के साथ सोमवार को रिठाड़ गांव गए। उन्होंने देवनाई घाटी के लोगों से तेंदुए से बचने के लिए सावधानी बरतने का आग्रह किया। बताया कि तेंदुए को कैद करने के लिए विभाग ने गांव में पिंजरा लगाया है। पिंजरे के अंदर कुत्ता को रखा गया है।