बागेश्वर के नायलमाफी से बजुर्ग मरीज को डोली से लाते लोग। संवाद न्यूज एजेंसी
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बागेश्वर। मानव चांद की सैर कर रहा है। कई महानगरों में बुलेट ट्रेन चल रही है लेकिन अपने पहाड़ के तमाम गांवों को एक अदद सड़क तक नहीं मिल सकी है। जिले की ग्राम पंचायत नायलमाफी भी उन्हीं अभागे इलाकों में शामिल है। सड़क से दूर होने के कारण आदिम जमाने की भांति आज भी वहां के लोगों का सहारा डोली ही है। रविवार को गांव के एक बीमार बुजुर्ग को गांव के लोग तीन किमी तक डोली पर लाए।
देश की आजादी के 72 साल बाद भी ग्राम पंचायत नायलमाफी के लोगों को यातायात सुविधा नहीं मिल सकी है। रविवार को गांव के अस्थमा से पीड़ित बुजुर्ग विशन दत्त भट्ट (62) को इलाज के लिए हल्द्वानी ले जाना था। गांव के लोगों के सामने उन्हें रोड हेड कठपुड़ियाछीना तक लाने की समस्या हो गई। आनन-फानन में गांव के लोगों को एकत्र किया गया। गांव के हरि दत्त मिश्रा, भुवन चंद्र मिश्रा, लक्ष्मी दत्त मिश्रा, चंद्रशेखर मिश्रा, राम दत्त मिश्रा, केवलानंद मिश्रा आदि बीमार को डोली में तीन किमी ढोकर कठपुड़ियाछीना तक लाए। वहां से बुजुर्ग को वाहन से हल्द्वानी ले जाया गया।
नायलमाफी के ग्राम प्रधान रिटायर्ड मेजर प्रेमबल्लभ ने बताया कि क्षेत्र के लोग कई दशकों से सड़क की मांग कर रहे हैं लेकिन सरकार, नेता और विभागीय अधिकारी अनदेखी कर रहे हैं। इस कारण गांव के लोग वनवासियों जैसा जीवन गुजारने को मजबूर हैं। सड़क सुविधा न होने के कारण ग्राम पंचायत से लगातार पलायन हो रहा है। सड़क निर्माण के लिए ग्राम पंचायत के लोगों ने आंदोलन की चेतावनी दी है।