कपकोट (बागेश्वर)। क्षेत्र में विकास की गति तेज होने के सरकारी दावे धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। असों-बसकूना मोटर मार्ग की बदहाली इसका जीता-जागता प्रमाण है, जहां निर्माण कार्य शुरू होने के नौ साल बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों को पक्की सड़क नसीब नहीं हो सकी है। आलम यह है कि सड़क अब भी डामरीकरण की बाट जोह रही है और आधा किलोमीटर हिस्से में तो अभी कटिंग का कार्य भी शेष है।
असों से बसकूना को जोड़ने वाली चार किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण कार्य दिसंबर 2016 में बड़े जोर-शोर से शुरू किया गया था। शुरुआत में साढ़े तीन किलोमीटर तक कटान का काम पूरा हुआ और एक किलोमीटर हिस्से में सोलिंग भी बिछाई गई। विभाग ने सड़क पर कॉजवे, कलवर्ट और पैरापिट का निर्माण भी कर दिया, लेकिन इसके बाद काम कछुआ गति का शिकार हो गया। डामरीकरण न होने से पूरी सड़क अब धूल और पत्थरों में तब्दील हो चुकी है।
ग्रामीण प्रमोद मेहता, गोविंद बोरा और गोविंद राठौर ने बताया कि बदहाल सड़क पर वाहन चलाना किसी खतरे से कम नहीं है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूली बच्चों को हो रही है, जिन्हें जीआईसी असों तक पहुंचने के लिए रोज पथरीले रास्तों पर पैदल आवाजाही करनी पड़ती है। सड़क निर्माण के दौरान गांव को जोड़ने वाली पुरानी पगडंडियां भी खत्म हो गई हैं, जिससे अब ग्रामीणों के पास कोई सुरक्षित विकल्प नहीं बचा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि विभाग की लापरवाही के कारण क्षेत्र की कनेक्टिविटी पूरी तरह ठप है। उन्होंने जल्द सड़क का कार्य शुरू नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
कोट
असों-बसकूना सड़क का डामरीकरण कार्य पीएमजीएसवाई के फेस चार के बैच एक में प्रस्तावित था। भारत सरकार की ओर से कुछ आपत्तियां प्राप्त हुई थीं, जिनका अब पूरी तरह निराकरण कर रिपोर्ट भेज दी गई है। अगले वित्तीय वर्ष 2026-27 में डामरीकरण का कार्य प्रस्तावित है और इसे समयबद्ध तरीके से पूर्ण कर लिया जाएगा। - अंबरीश रावत, ईई, पीएमजीएसवाई कपकोट