बागेश्वर। मानसून में आपदा से निपटने की जिला प्रशासन की तैयारियों के दावे सोमवार सुबह रवाईंखाल में भूस्खलन के सामने बौने साबित हुए। जिला मुख्यालय से महज आठ से दस किलोमीटर दूर एनएच बागेश्वर-गरुड़ मोटर मार्ग पर तड़के करीब पांच बजे पहाड़ी से भारी मलबा और बोल्डर सड़क पर आ गिरे। इससे मार्ग पूरी तरह बंद हो गया और दोनों ओर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतार लग गई। करीब पांच घंटे की मशक्कत के बाद सुबह 10 बजे मलबा हटाकर यातायात बहाल किया जा सका।
भूस्खलन के चलते सुबह के समय सड़क पर अचानक अफरा-तफरी मच गई। रवाईंखाल लंबे समय से आपदा की दृष्टि से संवेदनशील डेंजर जोन है। सोमवार की घटना में इन तैयारियों की जमीनी हकीकत सामने आ गई। सुबह करीब पांच बजे मार्ग बंद होने के बावजूद बीआरओ की लोडर मशीन लगभग तीन घंटे बाद मौके पर पहुंची। इतनी देर अस्पताल जा रही एंबुलेंस भी जाम में फंस गई। वहीं, अंतिम यात्रा में शामिल लोग शव के साथ घंटों मार्ग खुलने का इंतजार करते रहे। दफ्तर जाने वाले अधिकारी-कर्मचारी, टैक्सी और निजी वाहन, दूध की सप्लाई करने वाले वाहन और अखबार लेकर जा रही गाड़ियां भी जाम में फंसी रहीं।