बागेश्वर। टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन की सर्वे रिपोर्ट नवंबर 2020 में रेलवे बोर्ड को सौंपी जा चुकी है। इसके बावजूद रेल मंत्रालय ने एक बार फिर रेल लाइन की सर्वे को मंजूरी देने की बात कही है।
इससे नवंबर 2020 में की गई सर्वे रिपोर्ट की स्थिति पर सवाल उठने लगे हैं। लोग पूछते हैं कि क्या इस सर्वे के बाद 109 वर्ष पुरानी रेल परियोजना का काम शुरू हो जाएगा?
लोग चाहते हैं कि टनकपुर-बागेश्वर की 154.58 किमी लंबी लाइन के निर्माण का रास्ता अब साफ हो जाना चाहिए। सामरिक महत्व की इस रेल लाइन के निर्माण से बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत जिले के सरयू घाटी से सटे इलाकों को तो लाभ मिलता ही, तीनों जिले के लोगों की यातायात संबंधी दिक्कतों का काफी हद तक समाधान हो जाता।
मैदानी इलाकों से राशन, सब्जी भी सस्ते दामों पर बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चंपावत पहुंचता। चीन सीमा पर तैनात सेना के आने-जाने के लिए भी यह रेल लाइन मुफीद होती। लोग अब इस मुद्दे को सिर्फ चुनाव तक सिमटने के बजाय धरातल पर कार्य देखना चाहते हैं।
टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन तीनों जिलों के लोगों के लिए जीवनरेखा का काम करेगी। यातायात तो सुगम होगा ही, सरयू घाटी के लोगों के उत्पादों को बाजार मिलता। तीनों पहाड़ी जिलों से मैदान की दूरी कम हो जाती।
कैलाश अंडोला जिलाध्यक्ष माध्यमिक शिक्षक संघ बागेश्वर।
अंग्रेजों के समय से प्रस्तावित रेल लाइन का निर्माण आजादी के 74 वर्ष बाद भी न होना विकास की हकीकत को ही दिखाता है। टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन के निर्माण से पहाड़ी जिलों के विकास के द्वार खुलेंगे।
बबलू नेगी, अध्यक्ष, होटल एसोसिएशन, कौसानी।
टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन का निर्माण पहले हो जाना चाहिए था। रेल लाइन के लिए संघर्ष करने वाले कई लोग अब इस दुनिया में नहीं रहे रेल लाइन एक सपना ही रह गई है। रेल लाइन का सपना दिखाना अब बंद होना चाहिए।
- महिपाल भरड़ा, व्यवसायी, बागेश्वर।
यह रेल लाइन न केवल तीनों जिलों के सरयू घाटी से जुड़े लोगों के लिए वरदान साबित होगी। सामरिक महत्व की परियोजना घोषित करने के बाद भी रेल लाइन का निर्माण न होना गलत है। पहाड़ में रेल का सपना पूरा होना चाहिए।
- महिमन सिंह कपकोटी, सामाजिक कार्यकर्ता, कपकोट।